हाई ब्लडप्रेशर एवं डायबिटीज के मरीजों में स्ट्रोक यानी लकवा होने का अधिक खतरा : डॉ. गोपाल

हाई ब्लडप्रेशर एवं डायबिटीज के मरीजों में स्ट्रोक यानी लकवा होने का अधिक खतरा : डॉ. गोपाल
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मोतिहारी। विश्व स्ट्रोक (लकवा) दिवस के अवसर पर शहर के मिस्कौट स्थित जनसेवा स्पाइन फिजियोथेरेपी एण्ड पेन रिलीफ क्लिनिक में चम्पारण समाज कल्याण मंच के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्ट्रोक यानी लकवा के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार के बारे में बारे में जानकारी देते हुए प्रसिद्ध फिजियो चिकित्सक डॉ. गोपाल कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में ब्रेन स्ट्रोक की समस्या काफी बढ़ गई है। हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, एवं डायबिटीज से परेशान लोगों में लकवा होने का अधिक खतरा रहता है।
ब्रेन यानी दिमाग के रक्त वाहिका में अचानक रक्त का संचार रुक जाने एवं रक्त वाहिका के फट जाने यानी ब्रेन हेमरेज हो जाने की अवस्था को स्ट्रोक के नाम से जाना जाता है।
अचानक शरीर के एक साइड हांथ पैर में कमजोरी होना, बोलने एवं सुनने में परेशानी होना, हांथ पैर सुन्न होना, सिर में तेज दर्द होना, अचानक शरीर का संतुलन खराब होना, मुंह का एक तरफ टेढ़ा हो जाना, अवाज का साफ नही निकलना ये सब स्ट्रोक लकवा के लक्षण हो सकता है।
डॉ. गोपाल ने कहा कि लकवा के मरीज के उपचार एवं रिहैबिलिटेशन में फिजियोथेरेपी बहुत ही असरदार एवं कारगर साबित होता है। लकवा से ग्रसित मरीज को न्यूरो फिजियोथेरेपी के आधुनिक तकनीक के माध्यम से चलने के लायक बनाया जा सकता है।
स्ट्रोक लकवा से बचाव के लिए हाई ब्लडप्रेशर एवं ब्लड सुगर को नियंत्रित रखें, संतुलित आहार एवं हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें, तम्बाकू, धुम्रपान, शराब का सेवन नहीं करें, तनाव से बचें, नियमित व्यायाम करें।

anand prakash

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