हाईकोर्ट के आदेश पर नगर परिषद के शेड नंबर 37 व 38 खाली, सुरेंद्र प्रसाद को सौंपा गया शेड

हाईकोर्ट के आदेश पर नगर परिषद के शेड नंबर 37 व 38 खाली, सुरेंद्र प्रसाद को सौंपा गया शेड
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रक्सौल। नगर परिषद के शेड नंबर 37 एवं 38 को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का मंगलवार को न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर निष्पादन किया गया।

माननीय हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नगर परिषद प्रशासन ने पुलिस एवं दंडाधिकारी की मौजूदगी में दोनों शेड को खाली कराया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल एवं नगर परिषद के कर्मी मौके पर तैनात थे।

शेड खाली कराने की पूरी कार्रवाई नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सह दंडाधिकारी डॉ. मनीष कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी गौतम कुमार तथा रक्सौल थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो की देखरेख में संपन्न हुई। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रक्रिया को पूरा कराया और शेड नंबर 37 को सुरेंद्र प्रसाद को सुपुर्द कर दिया।

कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि शेड नंबर 37 एवं 38 को लेकर सुरेंद्र प्रसाद और प्रेमचंद्र साह के बीच काफी समय से विवाद चला आ रहा था। विवाद के कारण मामला न्यायालय तक पहुंच गया था। उन्होंने बताया कि माननीय न्यायालय के आदेश के आलोक में नगर परिषद प्रशासन द्वारा दोनों शेड को खाली कराने की कार्रवाई की गई। न्यायालय के निर्देश के अनुसार शेड नंबर 37 को सुरेंद्र प्रसाद को सुपुर्द कर दिया गया।

शेड नंबर 37 एवं 38 पर प्रेमचंद्र साह का कब्जा था। दोनों पक्षों के बीच शेड के स्वामित्व एवं कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला न्यायालय में विचाराधीन रहने के कारण प्रशासन की ओर से न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा की जा रही थी।

न्यायालय का आदेश प्राप्त होने के बाद मंगलवार को नगर परिषद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शेड को खाली कराया। मौके पर नगर परिषद के सिटी मैनेजर अविनाश कुमार, पंकज कुमार सिंह, सफाई इंस्पेक्टर रामनरेश कुशवाहा, मृत्युंजय मृणाल, संजय बैठा सहित नगर परिषद के कई कर्मी मौजूद थे।

इसके अलावा रक्सौल थाना पुलिस के जवान एवं पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में तैनात रहे। पुलिस की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है। इस दौरान किसी भी पक्ष को कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी गई।

anand prakash

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