विधान पार्षद सौरभ कुमार की सदस्यता पर मंडराता संकट टला, दोषसिद्धि पर सत्र न्यायालय की रोक
मोतिहारी। पश्चिमी चंपारण के राजद विधान पार्षद सौरभ कुमार को सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश श्री प्रकाश ने क्रिमिनल अपील संख्या 40/2026 पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत से हुई सौरभ कुमार के दोषसिद्धि पर रोक लगा दी है।
न्यायालय के इस आदेश से फिलहाल सौरभ कुमार की विधान परिषद सदस्यता पर मंडरा रहा संकट टल गया है। जिला न्यायालय स्तर पर दोषसिद्धि पर रोक का यह आदेश न्यायिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 के एक मामले में निचली अदालत ने 15 जून 2026 को सौरभ कुमार को दोषी करार देते हुए भिन्न भिन्न धाराओं में हुए सजा को जोड़कर कन्सीक्यूटिवली चार वर्ष एक माह के कारावास तथा 17 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
दोषसिद्धि के आदेश के बाद वे अपने अधिवक्ता संतोष कुमार के माध्यम से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में अपील दायर की थी। क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दोषसिद्धि के आदेश को विधि एवं तथ्यों के आधार पर त्रुटिपूर्ण बताते हुए विस्तृत दलीलें पेश की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष मामले से जुड़े विभिन्न कानूनी एवं तथ्यात्मक पहलुओं को रखा। न्यायालय ने अपर लोक अभियोजक ए.के तिवारी तथा बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपील स्वीकार करते हुए न्यायहित में मामले को दुर्लभ एवं असाधारण परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए निचली अदालत के दोषसिद्धि आदेश पर स्टे ऑफ कनविक्शन लगा दी।
न्यायालय के इस आदेश के बाद सौरभ कुमार को तत्काल राहत मिली है और उनकी विधान मंडल सदस्यता पर उत्पन्न संभावित संकट फिलहाल टल गया है। ऐसे ही चर्चित मामले में राहुल गांधी, नवजोत सिंह सिद्धू को उच्चतम न्यायालय से स्टे ऑफ कनविक्शन मिलने के बाद उनकी लोक सभा की सदस्यता बहाल हुई थी। वरीय अधिवक्ता शिवपूजन ठाकुर के पुत्र अधिवक्ता संतोष कुमार की प्रभावी कानूनी एवं तार्किक दलीलों की सराहना करते हुए अधिवक्ताओं ने उन्हें बधाई दी है।

