एडमिट कार्ड नहीं मिलने से नाराज छात्रों ने सड़क जाम कर यातायात किया ठप
-अधिकारी के आश्वासन के बाद शांत हुए छात्र
कल्याणपुर। आगामी 17 फरवरी से प्रारंभ होने वाली मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होने वाले
प्रखंड के दरमाहा स्थित राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय के 71 छात्र-छात्राओं को एडमीट कार्ड नहीं मिला है। नतीजतन छात्रों आक्रोश फूट गया। परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों ने केसरिया-चकिया मार्ग को बलिबेलवा पुल पर बांस का बल्ला लगा कर यातायात को बाधित कर विरोध प्रदर्शन किया। छात्र प्रधानाचार्य तथा बीईओ और डीईओ मूर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।
सड़क जाम की जानकारी पाकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी विनय तिवारी स्थानीय समाजसेवी शूभम कुमार सिंह सहित अन्य लोग मौके पर पहुंच कर स्थिति को काबू किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय प्रखंड विकाश पदाधिकारी चन्द्रगुप्त बैठा एवं बीईओ श्री तिवारी ने संयुक्त रूप से बताया कि विद्यालय के प्रधान शिक्षक विरेन्द्र ठाकुर से स्पष्टीकरण की मांग की गई है। जबाब संतोष जनक नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई करते हुए निलंबित करने के लिए विभाग को लिखा जाएगा।
वहीं बीईओ ने कहा कि जिन छात्र-छात्राओं का फॉर्म नहीं भरा पाया गया है, उनका फॉर्म भरकर उन्हे पूरक परीक्षा में शामिल किया जाएगा। जिनका रिजल्ट एक हीं समय आएगा। इससे छात्रों का समय बचेगा और छात्र आगे कि पढ़ाई भी जारी रखेंगे।
गौरतलब हो कि बीईओ ने बताया कि एच एम और साइबर कैफे की एक चूक सैकड़ों छात्रों का शूल्क एचएम डकार गए अब हुआ कारवाई और हो सकते हैं निलंबित।ज्ञात हो कि छात्र विद्यालय में पढ़ते हैं। परीक्षा प्रपत्र और शुल्क जमा करते हैं। प्रधानाध्यापक का काम है कि वह समय रहते देखें कि विद्यालय का कोई छात्र छूट तो नहीं गया। अगर कोई वित्तीय कठिनाई है तो सहायता करते हैं। अभिभावक को सूचना देते हैं। लेकिन यूएचएस दरमाहा के प्रधान शिक्षक ने 71छात्र-छात्राओं के मैट्रिक परीक्षा का शुल्क ही डकार लिया।
उनका आनलाइन परीक्षा प्रपत्र तो जमा हुआ लेकिन राशि गायब हो गई। 17 फरवरी से मैट्रिक की परीक्षा होनी है। बिहार बोर्ड ने इसके लिए डमी प्रवेश पत्र जारी कर दिया तो यूएचएस के छात्र भी अपना प्रवेश पत्र खोजने लगे। बोर्ड की वेबसाइट पर भी नहीं मिला तो स्कूल से संपर्क साधा। प्रधानाध्यापक विरेन्द्र ठाकुर ने भी बहला दिया।जब छात्रों की बेचैनी अभिभावकों ने देखी तो विद्यालय में हंगामा मच गया। और मामला स्पष्टीकरण पर जा अटका।

