तमिलनाडु के महाबलीपुरम की शिल्पकार हेमलता ने सहस्त्रलिंगम की कलाकृति
– 7 वर्षों में की कठिन परिश्रम के बाद महादेव के लिंग की हुई आकृति
– 2015 में आचार्य किशोर कुणाल ने सहस्त्र लिंगम महादेव निर्माण के लिए दिए थे ऑर्डर
-आज वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा की होगी प्राण प्रतिष्ठा
कल्याणपुर। चकिया केसरिया रामजानकी पथ पर स्थित कैथवलिया राजपुर में निर्माणाधीन विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण परिसर में 17 जनवरी आज सहस्त्रशिवलिंगम महादेव अनंत काल के लिए स्थापित हो जाएंगे। जाहिर है कैथवलिया एक बड़ा धाम विश्व स्तर पर जाना जाएगा। सहस्त्र लिंगम की स्थापना को लेकर भव्य तैयारियां की गई हैं, जो की इतिहास के पन्नों में जाना जाएगा। उल्लेखनीय है कि 210 टन वजन, 33 फीट ऊंचाई एवं 33 फीट मोटाई वाले विशाल शिवलिंग को 96 चक्का वाली विशेष गाड़ी से लाकर आधार पीठ के समीप पहुंचाया गया है।
अत्याधुनिक क्रेन की सहायता से इस महाकाय शिवलिंग को स्थापित करने का कार्य कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। स्थल पर मौजूद कारीगर क्रेन के सहारे शिवलिंग को सीधा कर उसे आधार पीठ पर स्थापित करने में जुटे है। शिवलिंग की स्थापना को लेकर सहस्त्रशिवलिंगम के प्रमुख शिल्पकार भी मौके पर मौजूद हैं। उनकी देखरेख में पूरा कार्य सावधानीपूर्वक देर रात तक कराया गया । अलबत्ता सुरक्षा और तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि इतने विशाल महादेव निर्मित पत्थर की स्थापना सफलतापूर्वक हो सके।
शिल्पकार ने बताया कि उनका परिवार दिल्ली और चेन्नई में निवास करता है। उनकी माता हेमलत्ता देवी पिछले 35 वर्षों से शिल्पकला के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं और एक अनुभवी कलाकार हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में हनुमान मंदिर के माध्यम से किशोर कुणाल द्वारा सहस्त्रशिवलिंगम के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद तमिलनाडु के महाबलीपुरम में इस विशाल पत्थर का चयन किया गया। माता हेमलत्ता देवी की देखरेख में सहस्त्रशिवलिंगम का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। वे पहले से ही मूर्तिकला के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अबतक लगभग 40 मंदिरों में विभिन्न प्रकार की मूर्तियों का निर्माण करवा चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में इस विशाल शिवलिंग का निर्माण किया गया, जिसे तैयार करने में लगभग सात वर्षों का समय लगा।
इस कार्य में दो दर्जन से अधिक शिल्पकारों ने लगातार मेहनत की है।विश्व के इस अनूठे सहस्त्रशिवलिंगम की स्थापना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।

