तुरकौलिया में कैश बरामदगी मामले में जांच तेज
-थानाध्यक्ष के निलंबन के बाद कारवाई की जद में आयेंगे कुछ और अधिकारी
-घटना को लेकर डीजीपी के निर्देश पर विभिन्न पहलुओं पर जांच जारी
मोतिहारी। तुरकौलिया के निमोईया चौक के नजदीक रात को पुलिस की कारवाई में तस्करों की जांच के दौरान पकड़ाये मोटी रकम का मामला तूल पकड़ने लगा है। दरअसल इस मामले की जानकारी डीजीपी को मिली, जिसके बाद इओयू को यह पूरा मामला सौंप दिया गया। जिसमें डीएसपी स्तर के पदाधिकारी द्वारा इस मामले की जांच की गई है। दिलचस्प बात यह है कि चकिया थाने की पुलिस ने 25 मई की रात 12 बजे से पहले टॉल प्लाजा पर कार सवार चार लोगों को पकड़ा। फिर यह पूरा मामला तुरकौलिया पहुंचा। जिसको लेकर तुरकौलिया थानाध्यक्ष ने अपने बयान पर मामला दर्ज किया।
बताया गया कि उन्होंने रात के 1.10 बजे कार सवार चार लोगों को पकड़ा जिनसे मोटी रकम बरामद की गईं। बताया गया है कि यह वाक्या 25 की है तो 28 को एफआईआर क्यों हुआॽ तुरकौलिया के तत्कालीन थानेदार संपत कुमार ने 28 मई 2026 को अपने स्व लिखित बयान के आधार पर केस संख्या 281/ 26 दर्ज किया। जिसमें कहा गया कि 26 मई की रात 12:50 बजे मुझे सूचना मिली कि उजले रंग की कार से अवैध कारोबारी पटना की ओर से आ रहे हैं।
वे अपने साथ भारी मात्रा में नगद राशि लेकर चल रहे हैं, जो संभवत अवैध धंधों से अर्जित की गई है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल वरीय अधिकारी को इस संबंध में सूचना दिया, फिर पुलिस बल के साथ रवाना हुआ। तुरकौलिया थाना क्षेत्र के निमोईया चौक पर सघन वाहन जांच प्रारंभ की गई,इसी क्रम में रात करीब 1:10 बजे मोतिहारी की ओर से एक उजले रंग की संदिग्ध कर आती हुई दिखाई दी, जिसे रोका गया। गाड़ी में सवार व्यक्ति से पूछताछ की गई। उन्होंने अपना नाम कृष्णा सहनी आदापुर, सुभाष कुमार नकरदेई दोनों पूर्वी चंपारण के निवासी थे, वहीं दीपेश कुमार यादव और प्रज्वल सोनी दोनों जिला- बारा नेपाल के रहने वाले थे।
विधि सम्मत तरीके से उजले रंग की कार की तलाशी ली गई। इस दौरान डिक्की के तहखाना में छुपा कर रखी गई 24 लाख 91300 की नगद बरामद की गई। बरामद राशि के संबंध में सवार व्यक्ति से पूछताछ की गई, लेकिन उनके द्वारा कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इस मामले में तत्कालीन एसएचओ ने वरीय को उतर के माध्यम से सूचित करते हुए अग्रिम कारवाई के लिए निर्देश मांगा गया था। वहीं मामले में केस दर्ज करने के बाद चारो आरोपियों को थाने से ही बेल दे दिया गया।
दरअसल केस दर्ज करने में देरी के पीछे बड़ा खेल की चर्चा जोरो पर है , जो संभवतः जांच का अहम बिंदु भी है। केस को मैनेज करने के लिए 26 तारीख से लेकर 28 तारीख तक बड़ा खेल हुआ, जिसमें डील होने और मोटी रकम वसूलने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक इन सभी का 25 लाख रूपए तो जब्त हुए ही, रिहाई के लिए 35 लाख रूपये पुलिस अधिकारियों के नाम पर कथित रूप से वसूल किये गए। निचले अधिकारियों ने वरीय के नाम पर 25 लाख व अपने लिए 10 लाख रूपये लिया, जाहिर है यह मसला सूक्ष्मता से जांच योग्य है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब लुट चुके शख्स का भाई डीजीपी के पास शिकायत लेकर पहुंच गया।
डीजीपी को पूरी बात बताई गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि मोतिहारी के उगम पांडेय कॉलेज के पीछे एक पुलिस अधिकारी का खास आदमी रहता है, जो एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर 35 लाख रू रिश्वत की रकम ली। अगर टावर लोकेशन की पड़ताल कराई जाये तो पुलिसकर्मियों की पोल खुल जायेगी और सभी बेनकाब होंगे। बताया जा रहा है कि इस मामले में डीजीपी द्वारा पुलिस अधीक्षक से भी रिपोर्ट मांगी गई है। लिहाजा यह जाहिर है कि पुलिस महकम्मा स्थानीय स्तर पर भी इस घटना की जांच कर मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगी। एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया है कि मामले में जो लोग दोषी होंगे विधिसम्मत कारवाई की जायेगी।
वरीय पत्रकार विनोद सिंह की रिपोर्ट

