पीपराकोठी में निर्मित होने वाले वाटर पार्क मामले में किसानों के पक्ष में उतरे पूर्णिया सांसद पप्पू यादव
-संसद से लेकर हाई कोर्ट तक लड़ाई का ऐलान
-सुरक्षा को लेकर प्रशासन की ओर से की गई थी व्यापक इंतेजाम
पीपराकोठी।पूर्णिया सांसद पप्पू यादव किसानों के भूमि अधिग्रहण मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा है कि किसानो की लड़ाई बेटा बनकर लड़ेंगे वे शनिवार को पिपरा कोठी पहुंचे थे। किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानो की भूमि नहीं छीन जाएगी इस मामले को जोरदार ढंग से संसद में उठाया जाएगा। वही हाई कोर्ट में रिट दायर कर किसानों को न्याय दिलाया जाएगा।
अलबत्ता उनके इस कार्यक्रम के दौरान किसाने की संख्या ज्यादा नहीं थी। सांसद निर्माण कार्य स्थल तक नहीं गए। वे वाटगंज चौक पर उपस्थित लोगों को संबोधित किये। उन्होंने कहा कि जिले में भू-माफियाओं का साम्राज्य है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों का शोषण किया जा रहा है। 70 वर्षों से यह भूमि किसानों के कब्जे में है। उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद हीं निर्माण कार्य आरंभ कराना चाहिए था। कहा कि अदालत के अनुसार जो भूमि 60-70 वर्षों से जिसके कब्जे में है। उनके नाम से स्वामित्व प्रमाण पत्र देना है। जब कि इस भूमि के सभी कागजात किसानों के पास उपलब्ध है। आरोप लगाया कि वाटर पार्क के नाम पर किसानों की पुश्तैनी और रैयती जमीन छीनकर पूंजीपतियों को सौंपने की साजिश रची जा रही है।
मोतिहारी और बेतिया में राजगढ़िया परिवार द्वारा करीब सौ वर्ष पहले किसानों को दी गई जमीन की 75 वर्ष पूर्व नियमानुसार रजिस्ट्री हो चुकी है। किसानों के पास केवाला, जमाबंदी, खेसरा और वर्षों से कब्जा भी है। बावजूद प्रशासन बिना समुचित सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए जमाबंदी रद्द कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित पैसे के प्रभाव में किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ किया जा रहा है। सवाल उठाया कि जिस चीनी मिल की जमीन पर वर्षों से विवाद रहा, उसकी करीब सौ एकड़ भूमि आखिर किन लोगों को दे दी गई।
सरकार किसानों की जमीन बचाने के बजाय प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने में लगी है। सांसद श्री यादव के आगमन को लेकर प्रशासन सुबह से हीं मुस्तैद दिखा। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए दो सौ पुरुष व महिला जवानों की तैनाती की गई थी। चार डीएसपी के साथ तीन थानों के थानाध्यक्ष सहित यातायात के जवान भी तैनात थे।
एक दिन पूर्व हुई एफआईआर के कारण ग्रामीणों की जमावड़ा कहीं भी देखने को नहीं मिला। पुलिस की टुकड़ी को निर्माण स्थल, चौराहा, एग्रीकल्चर कॉलेज सहित आधा दर्जन स्थानों पर लगाया गया था। फलस्वरूप शांति व्यवस्था कायम रखने को लेकर सांसद निर्माण स्थल तक नहीं जा पाए।

