विश्व पर्यावरण दिवस पर एमजीसीयू में 55 विद्यालय हुए सम्मानित
मोतिहारी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा आचार्य बृहस्पति सभागार में “पर्यावरण की रक्षा क्यों और कैसे करें” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित उत्तर बिहार के प्रांत संयोजक सुधांशु मिश्रा ने कहा कि “बीज दान महादान है।” एक छोटा-सा बीज भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर न केवल पर्यावरण को संरक्षित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और समृद्धि का आधार भी तैयार करता है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से वृक्षारोपण एवं बीज संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आग्रह किया। विशिष्ट वक्ता डॉ. कुशाग्र ने कहा कि भारतीय सभ्यता में धर्म, संस्कृति और प्रकृति सदैव एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। हमारी परंपराओं में नदियों, वृक्षों, पर्वतों तथा प्राकृतिक संसाधनों को पूजनीय मानकर पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अभिन्न अंग बनाया गया है। उन्होंने सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम के संयोजक एवं जीव विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. प्राणवीर सिंह ने कहा कि “प्रकृति ही आदि है और प्रकृति ही अंत है। ” उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और ऋषि-मुनियों के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति सृष्टि का मूल आधार है। जबकि मानव और प्रकृति का संबंध अटूट एवं अविभाज्य है।पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता है।
इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 55 विद्यालयों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अत्रिज्ञान पाल ने की। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुंदन किशोर रजक ने प्रस्तुत किया, जबकि मंच संचालन रश्मि मिश्रा ने किया। इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी विनय कुमार, डॉ. एस. चौरसिया, नवनीत कुमार गिरि, राजीव रंजन, रंजन श्रीवास्तव, चन्द्रलता वर्मा, पंकज वर्मा, के.के. तिवारी, केशव कुमार, प्रो. अखिलेश सिंह, आदर्श कुमार ओझा, डॉ. विनय सिंह, यश मिश्रा, रंजीत गिरी, राज गुरु सहित बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक उपस्थित थे।

