एमजीसीयू में विश्व हाइड्रोजन एवं ईंधन दिवस पर भौतिकी विभाग ने किया राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

एमजीसीयू में विश्व हाइड्रोजन एवं ईंधन दिवस पर भौतिकी विभाग ने किया राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
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मोतिहारी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग ने गुरूवार को विश्व हाइड्रोजन एवं ईंधन दिवस के अवसर पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा के वैकल्पिक एवं हरित स्रोतों विशेष रूप से हाइड्रोजन ऊर्जा पर अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव
के संबोधन से हुआ। कुलपति प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि आज के वैज्ञानिकों, विशेषकर युवा शोधकर्ताओं को राष्ट्र की प्रगति के लिए मूलभूत अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हमें विदेशी निर्भरता से मुक्त होकर स्वदेशी समाधान विकसित करने होंगे। उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ. श्वेता सिंह एवं विभाग के सभी शिक्षकों को बधाई दी।


कार्यक्रम संयोजक डॉ. श्वेता सिंह ने संगोष्ठी में उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और बताया कि यह संगोष्ठी हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में नवीनतम शोध और तकनीकी विकास पर विचार-विमर्श का एक महत्त्वपूर्ण मंच है।
संगोष्ठी में देशभर से कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर मोहम्मद अबू साज (भौतिकी विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) ने हाइड्रोजन ऊर्जा के संचयन के विभिन्न तरीकों पर अपने शोध कार्य साझा किए।

उन्होंने इस क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए युवाओं को इस दिशा में अनुसंधान हेतु प्रेरित किया।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से विशिष्ट वक्ता डॉ. सनीथ एम ने मानव सभ्यता के ऊर्जा उपयोग के विकासक्रम पर प्रकाश डालते हुए हरित (ग्रीन) हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा और फ्यूल सेल तकनीक की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण अब समय की आवश्यकता है कि हम टिकाऊ और पर्यावरण-संवेदनशील ऊर्जा समाधानों की ओर अग्रसर हों।

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय से आए डॉ. रोहित रंजन शाही ने हाइड्रोजन ऊर्जा के संचयन हेतु उच्च एंट्रोपी मिश्र धातुओं के संश्लेषण एवं उनके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह तकनीक भविष्य में ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है।
कार्यक्रम के दौरान भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुनील श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इस प्रकार की संगोष्ठियों के आयोजन की निरंतरता पर बल दिया।
संगोष्ठी में देशभर से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और छात्रों ने भागीदारी की। आयोजन हाइड्रोजन ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के क्षेत्र में विचार, अनुसंधान और सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सशक्त पहल सिद्ध हुआ।

anand prakash

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