मोतिहारी सेंट्रल जेल में “नालसा” के लिए विधिक सेवाएं योजना” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

मोतिहारी सेंट्रल जेल में “नालसा” के लिए विधिक सेवाएं योजना” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
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-नालसा बीमार बंदियों को मानवीय सहयोग, परामर्श एवं पुनर्वास की भी आवश्यकता : सचिव

मोतिहारी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार पूर्वी चंपारण के  तत्वावधान में केंद्रीय कारा मोतिहारी में “नालसा मानसिक रूप से बीमार एवं बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएं योजना” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था कि जेल में निरुद्ध मानसिक रूप से बीमार, बौद्धिक दिव्यांग एवं अन्य वंचित बंदियों को  संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए  उन्हें न्याय तक प्रभावी पहुंच  सुनिश्चित कराना रहा। कार्यक्रम में जेल अधीक्षक विजय अरोड़ा, लॉ फाउंडेशन से आए संसाधन व्यक्ति, जेल प्रशासन के अधिकारी, पारा विधिक स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला बंदियों ने भाग लिया।इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव नितिन त्रिपाठी ने बंदियों के अधिकार, पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य सहायता एवं निःशुल्क विधिक सेवाओं के महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।उन्होंने  कहा कि विधिक सेवा संस्थाओं का उद्देश्य केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय एवं अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित कराना है। 

मानसिक रूप से बीमार एवं बौद्धिक दिव्यांग बंदियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तियों को केवल कानूनी सहायता ही नहीं बल्कि मानवीय सहयोग, परामर्श एवं पुनर्वास की भी आवश्यकता होती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार लगातार समाज के वंचित एवं हाशिए पर रह रहे बंदी, महिला, बच्चे, दिव्यांग, वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों तक विधिक जागरूकता पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे है।

जेलों में विधिक जागरूकता शिविर, सहायता शिविर एवं सुधारात्मक गतिविधियों के आयोजन का मकसद बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ने को लेकर है। इस अवसर पर लॉ फाउंडेशन के संसाधन व्यक्तियों ने नालसा योजना, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, निःशुल्क विधिक सहायता, बंदियों के अधिकार, पुनर्वास एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। 

बंदियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें आवश्यक विधिक परामर्श भी उपलब्ध कराया गया। इस अवसर पर  सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार श्री त्रिपाठी  ने जेल परिसर में “ई-मुलाकाती विधिक सहायता हेल्प डेस्क” एवं  “मानसिक रोगी वार्ड” का उद्घाटन  किया। कार्यक्रम के दौरान बंदी पुरुष एवं महिलाओं  के बीच खेल सामग्री का वितरण किया गया। जेल अधीक्षक विजय अरोड़ा ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बंदियों में जागरूकता, आत्मविश्वास एवं सुधार की भावना विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।

anand prakash

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