सिविल न्यायालय में नवनियुक्त लगभग 140 उच्च वर्गीय लिपिकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित
मोतिहारी। समाहरणालय स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभागार में सिविल न्यायालय, मोतिहारी में नवनियुक्त लगभग 140 उच्च वर्गीय लिपिकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रातः 10 से अपराह्न 5: बजे तक आयोजित किया गया, जिसमें न्यायिक पदाधिकारियों एवं न्यायालय के वरिष्ठ कर्मियों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन न्यायाधीश प्रभारी प्रशासन-सह-सचिव नितिन त्रिपाठी ने किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी सहित न्यायालय के कई न्यायिक पदाधिकारी एवं वरिष्ठ कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम बिहार ज्यूडिशल अकादमी के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार आयोजित किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य नवनियुक्त कर्मियों को न्यायालय की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक संरचना, नियमावली एवं न्यायिक प्रक्रिया की व्यवहारिक जानकारी प्रदान करना है, ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन दक्षता एवं पारदर्शिता के साथ कर सकें।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नितिन त्रिपाठी ने कहा कि न्यायालयी व्यवस्था की सफलता में न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ न्यायालय कर्मियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। न्यायालय कर्मचारी न्यायिक प्रणाली की आधारशिला हैं। उनके कार्यों की दक्षता एवं अनुशासन से ही आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास और अधिक मजबूत होता है।
उन्होंने नव नियुक्त कर्मियों को कहा कि न्यायालय में कार्य करना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लिहाजा समयबद्धता, निष्पक्षता, गोपनीयता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया तथा न्यायालयी अभिलेखों के संधारण, वाद प्रबंधन एवं पक्षकारों के प्रति व्यवहार में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों एवं वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा सिविल न्यायालय की संरचना, विभिन्न शाखाओं के कार्य, न्यायालयीन फाइलों के संधारण, अभिलेख प्रबंधन, रजिस्टर संधारण, न्यायालयीन प्रक्रियाएं, सेवा पुस्तिका संधारण, न्यायालयीन शिष्टाचार, कार्यालयी अनुशासन, ई-कोर्ट प्रणाली एवं डिजिटल कार्यप्रणाली सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में नव नियुक्त कर्मियों को न्यायालयों में प्रचलित नियमों एवं विनियमों की जानकारी देने के साथ-साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान भी विशेषज्ञों एवं पदाधिकारियों द्वारा विस्तारपूर्वक किया गया। नोडल पदाधिकारी रंजीत चौधरी ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य नव नियुक्त कर्मियों को प्रारंभिक स्तर पर ही न्यायालयीन कार्य प्रणाली से परिचित कराना है, जिससे वे अपने कार्यों को अधिक कुशलता एवं आत्मविश्वास के साथ संपादित कर सकें।

