राज्य सभा में भाजपा के सांसदों की संख्या हुई 113, सभापति ने 7 सांसदो की विलय को दी मंजूरी

राज्य सभा में भाजपा के सांसदों की संख्या हुई 113, सभापति ने 7 सांसदो की विलय को दी मंजूरी
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नई दिल्ली। राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ताकत और बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी (आआपा) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राघव चड्ढा समेत सात सांसदों को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने औपचारिक मंजूरी दे दी है।इसके बाद राज्यसभा में भाजपा सांसदों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है।

सोमवार को राज्यसभा सचिवालय द्वारा सदन में सभी दलों के सांसदों की अद्यतन सूची जारी की गई, जिसमें इन सातों नेताओं के नाम भाजपा सांसदों की सूची में शामिल कर दिए गए। इससे भाजपा को उच्च सदन में और अधिक राजनीतिक मजबूती मिली है।

उल्लेखनीय है कि 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। ये सभी अब आधिकारिक रूप से भाजपा संसदीय दल का हिस्सा बन चुके हैं।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा, राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भाजपा में विलय को स्वीकार कर लिया है। अब राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी भाजपा संसदीय दल के सदस्य हैं।

रिजिजू ने इन सांसदों की कार्यशैली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उन्होंने देखा है कि इन सात सांसदों ने कभी भी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया और न ही कोई अनुशासनहीन या गैर-संसदीय आचरण किया। उन्होंने इसे सकारात्मक राजनीति का उदाहरण बताया।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सभी का स्वागत है। साथ ही उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए ‘टुकड़े-टुकड़े’ गठबंधन को अलविदा कहने की बात भी कही।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस घटनाक्रम से राज्यसभा में भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी तथा आगामी विधायी कार्यों में पार्टी को रणनीतिक लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब संसद के उच्च सदन में संख्या बल कई महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने में निर्णायक भूमिका निभाता है, यह बदलाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

anand prakash

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