एमजीसीयू में भजन, विचार और सेवा संकल्प के साथ मनाया गया गांधी जयंती
कुलपति ने ‘सत्य और अहिंसा’ को बताया समय की सबसे जरूरत
मोतीहारी।महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के गांधी एवं शांति अध्ययन विभाग द्वारा महात्मा गांधी की 156वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने गांधी भवन स्थित गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम की शुरुआत गांधी जी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति से हुई। डॉ. श्याम कुमार झा, अध्यक्ष संस्कृत विभाग, ने अपने सुमधुर स्वर में भजनों की प्रस्तुति दी। उनके साथ राजनीतिक विज्ञान विभाग के ऋत्विज, हिंदी विभाग के मनोज, और सामाजिक कार्य विभाग के विनय कुमार ने भी भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए। तबला वादन में विजय कुमार ने संगत दी।इस अवसर पर अपने संबोधन में कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा,
“महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं — एक ऐसी चेतना, जिसने पूरी दुनिया को अहिंसा, सत्य और सेवा के मंत्र दिए। उनके सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता संग्राम के समय थे। सत्याग्रह उनके जीवन का सार था और यह कोई एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं था, बल्कि एक जनचेतना थी, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया, अपने प्राणों की आहुति दी, और भारत को स्वतंत्रता दिलाने की राह प्रशस्त की। उनके ‘स्वराज’, ‘सर्वोदय’ और ‘सत्याग्रह’ जैसे सिद्धांत, हमारे लिए मार्गदर्शक हैं।”
कुलपति ने गांधी एवं शांति अध्ययन विभाग की ओर से ‘उन्नत भारत अभियान’ के अंतर्गत गोद लिए गए पाँच गांवों में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और विभाग को ऐसे सार्थक आयोजनों के लिए बधाई दी।
वही मुख्य प्रॉक्टर एवं गांधी भवन परिसर निदेशक प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने कहा,गांधी जी का दर्शन केवल इतिहास नहीं, वर्तमान और भविष्य का पथप्रदर्शक है। हमें उनके सिद्धांतों को व्यवहार में लाकर एक समावेशी, शांतिपूर्ण और स्वावलंबी भारत की ओर अग्रसर होना है।”
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्रोफेसरों में प्रो. शिरीष मिश्रा, प्रो. बिमलेश सिंह, प्रो. राजेन्द्र सिंह, डॉ. शिवेन्द्र, डॉ. अनुपम, डॉ. अम्बिकेश त्रिपाठी सहित शिक्षक, कर्मचारी और छात्र उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अभय विक्रम सिंह ने किया।

