नेपाल के वीरगंज स्थित गहवा माई स्थान में जुटे दोनो देश के हजारो श्रद्धालु
रक्सौल। नेपाल के वीरगंज स्थित प्रसिद्ध गहवा माई मंदिर में दुर्गापूजा के अवसर पर भारत-नेपाल दोनो देश के लाखो श्रद्धालु जुटे।इस दौरान नेपाल के परंपरा के अनुसार 5,000 से अधिक पशु-पक्षियों की बलि दी गई।
बलि की परंपरा शुरूआत महाअष्टमी के सुबह 7:45 बजे माता के गर्भगृह में दीप प्रज्ज्वलित होने के साथ शुरू हुई।
सबसे पहले पंच बलि के तहत चूहा, हंस, भेड़, पाड़ा और बकरा की बलि दी गई। इसके बाद गहवा माई मंदिर पहुंचे श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने के उपलक्ष पर बकरा, मुर्गा, कबूतर आदि की भी बलि प्रदान किया।
वही कुछ श्रद्धालुओ ने पक्षियो उड़ाकर बलि परंपरा का निर्वहन करते हुए उन पक्षियो को जीवन दान दिया।बलि परंपरा को पूरी करने के लिए गहवा माई मंदिर के पीछे एक बड़ा गड्डा खोदा गया था।
मंदिर प्रबंधन के लोगो ने बताया कि बलि के दौरान पशु-पक्षियों के सिर और रक्त उसी गड्ढे में एकत्र किए गए है,जिसे बाद में मिट्टी से भरकर बंद कर दिया जायेगा। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह परंपरा प्राचीन धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और हर वर्ष अष्टमी तिथि को यह बलि परंपरा शुरू होती है,जो नवमी तक चलता है। मंदिर में भारी भीड़ को देखते हुए वीरगंज प्रशासन ने घंटाघर चौक से गहवा माई मंदिर तक व मंदिर से छपकैया तक दोपहिया और चारपहिया गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी। आदर्शनगर से मंदिर तक का क्षेत्र ‘नो एंट्री’ घोषित किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1000 सुरक्षा कर्मियों और 1000 से ज्यादा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया था,जिसमें नेपाल पुलिस और सशस्त्र बल के साथ ही वीरगंज के विभिन्न नागरिक संगठन के लोग शामिल थे।

