एमजीसीयू में “सशक्त महिला,विकसित भारत” विषयक विचार संगोष्ठी का आयोजन

एमजीसीयू में “सशक्त महिला,विकसित भारत” विषयक विचार संगोष्ठी का आयोजन
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मोतिहारी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परिषद् द्वारा “सशक्त महिला : विकसित भारत” विषयक विचार संगोष्ठी का आयोजन शुक्रवार को वृहस्पति सभागार में किया गया।कार्यक्रम की शुरूआत माँ सरस्वती की प्रतिमा एवं महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

गोष्ठी का प्रयोजन भारत सरकार के नीतिगत निर्णय “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को बल प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम के संयोजक प्रो. प्रसून दत्त सिंह, अध्यक्ष सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परिषद् ने अपने स्वागत वक्तव्य में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “यह संगोष्ठी केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं है, बल्कि विकसित राष्ट्र निर्माण, सामाजिक चेतना को सुदृढ़ करने तथा महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है। महिला सशक्तिकरण आज केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास का केंद्रीय आधार बन चुका है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि “सशक्त महिला ही विकसित राष्ट्र की आधारशिला है। महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त है।” उन्होंने महिलाओं की नीति-निर्माण एवं निर्णय प्रक्रिया में समान और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया जिससे भारत सरकार का नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाया जा सके। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. सुषमा यादव (पूर्व कुलपति, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, हरियाणा एवं पूर्व सदस्य, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली) ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण के ऐतिहासिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि “शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिसके द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी एवं जागरूक बनाया जा सकता है।”

विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रो. मधु सिंह, प्राचार्या, आर. बी. बी. एम. महाविद्यालय, बी. आर. ए. बिहार, विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर ने महिला शिक्षा, सामाजिक जागरूकता एवं ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की स्थिति पर विशेष बल देते हुए कहा कि वंचित एवं ग्रामीण वर्ग की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ना समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है, क्योंकि समावेशी विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं को सशक्त बनाया जाए।

वहीं प्रो. सपना सुगंधा, विभागाध्यक्ष, प्रबंधन विज्ञान विभाग,एमजीसीयू ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक आधार आर्थिक आत्मनिर्भरता, उद्यमिता एवं नेतृत्व क्षमता का विकास है। उन्होंने उल्लेख किया कि आत्मनिर्भर एवं सक्षम महिला न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज में भी सकारात्मक एवं स्थायी परिवर्तन की वाहक बनती है। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता एवं समावेशी विकास जैसे समसामयिक विषयों पर व्यापक, गंभीर एवं सार्थक विमर्श किया गया, जिससे सभागार में उपस्थित शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं को गहन चिंतन हेतु प्रेरित किया। संगोष्ठी के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सुदृढ़ता, सामाजिक न्याय, डिजिटल सहभागिता एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व, उद्यमिता जैसे विविध आयामों पर गंभीर चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि “विकसित भारत” की संकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब महिलाओं को समान अवसर, सम्मान एवं निर्णय-निर्माण में कानूनी एवं सामाजिक स्वीकारिता के साथ ही प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित होगी।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही। संवादात्मक सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने विचार एवं प्रश्न प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुस्कान भारती द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुपम कुमार वर्मा ने किय। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. नरेंद्र सिंह की मुख्य भूमिका रही।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो. शिरीष मिश्रा, प्रो. श्याम कुमार झा, प्रो. ए. के. शरण, डॉ. शिवेंद्र सिंह, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. मृत्युंजय सिंह, डॉ. रामलाल, डॉ. ओमकार, डॉ. बबलू पाल, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. अमित ज्ञान रंजन, डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, डॉ अजीत कुमार, डॉ नवनीत कुमार, डॉ राजीव चौबे,अमित, डॉ. अल्पिका त्रिपाठी,सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।

anand prakash

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