हाथी पर मां दुर्गा का आगमन और डोली में प्रस्थान विश्व एवं भारत के लिए शुभ:चंचल बाबा
– प्रधानमंत्री मोदी भी मोतिहारी में चंचल बाबा से मिलकर हुए थे धन्य
मोतिहारी। शहर के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पराम्बा शक्ति पीठ के पीठाधीश्वर श्री शक्तिशरण जी महाराज उर्फ चंचल बाबा का आश्रम स्थित माँ भगवती का मंदिर बिहार, नेपाल, दिल्ली व नोएडा में काफी प्रसिद्ध है। इस आश्रम की विशेष प्रसिद्धि तब और भी बढ़ गई, जब चंद माह पूर्व मोतिहारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए थे। उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उक्त आश्रम के संस्थापक 90 वर्षीय वयोवृद्ध श्री शक्ति शरण महाराज उर्फ चंचल बाबा से मिलकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। बड़े ही आत्मिक भाव से उनका मिलन हुआ था। वह मिलना ऐसा था, मानो लंबे अंतराल के बाद दो महान आत्माओं का आपस में मिलन हो रहा है। पूरा विश्व उस दृश्य को देखा था। इस वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर उक्त आश्रम में बड़े ही भक्ति भाव से कलश स्थापन किया गया है।आश्रम में स्थाई रूप से स्थापित दुर्गा की अष्टमूर्ति के दर्शन के लिए श्रद्धालु वहां आते हैं और देवी माता के साथ-साथ चंचल बाबा से भी आशीर्वाद और वरदान लेते हैं। अपने दैनिक कार्यक्रम अंतर्गत मंत्र शोधन विधि से चंचल बाबा हवन कुंड में जड़ी बूटियां को जलाकर मंत्र विधि से आज भी शोधन करते हैं। जिससे जो भस्म तैयार होता है वह एक तरह से जादूयी भस्म होता है। जिसके सेवन से शारीरिक व्याधि से लोग मुक्त होते हैं।
यह भस्म वहां मुफ्त में दिया जाता है। सप्तमी के दिन भस्म निर्माण के बाद चंचल बाबा ने दुर्गा पूजा एवं दुर्गा जी के आगमन पर अपने शिष्यो को बताया कि सनातन धर्म संस्कृति अनुसार वेद, ग्रंथ ,पुराण शास्त्र आदि समस्त ब्रह्मांड के लिए है न कि केवल भारत के लिए। भारत की भूमि पर जो भगवती दुर्गा का आह्वान किया जाता है, वह शारदीय नवरात्री में भारत के उत्थान के साथ-साथ विश्व शांति और समस्त प्राणियों के लिए ही होता है।
दुर्गा पूजा मे हवन आदि जो किया जाता है, वह पूरे वायुमंडल को वायरस मुक्त करता है। उन्होंने बताया कि भगवती को नवदुर्गा के रूप में पूजा किया जाता है । 2025 के शारदीय नवरात्री में मां भगवती का आगमन हाथी पर और प्रस्थान डोली में होने से राष्ट्र के लिए यह शुभ संकेत है।
समस्त प्राणियों के लिए भविष्य में आने वाले संकट से सुरक्षा होगी, इसे अति उत्तम माना गया है। भगवती प्रकृति के रूप में एवं मां काली शक्ति स्वरुपा है, जो शक्ति प्रदान करती हैं, महालक्ष्मी जो धन-वैभव से व्यक्ति को समृद्धशाली और सुखी रखती है।मां सरस्वती जो ज्ञान विज्ञान, विवेक, योग ,शक्ति और तपस्या आदि से परिपूर्ण करती है। तीनों रूप मानव कल्याणार्थ होता है, यह मनुष्य पर निर्भर करता है कि कितनी भक्ति भाव से उन शक्तियों से संपन्न बनता है।
उन्होंने बताया कि सप्त ऋषियों ने इसका वर्णन किया है। महर्षि व्यास ने चार वेद ,6 शास्त्र 18 पुराण, अनगिनत काव्य गीता और उपनिषद आदि के द्वारा शक्ति पूजन के लिए पर ब्रह्म परमात्मा का प्रकृति के रूप में इस संसार को जन्म से लेकर मरण तक जीवन जीने का साधन तरीका और उत्थान करने का मार्गदर्शन करती है। उस भगवती का सतो रजो और तमोगुण के द्वारा इस संसार को धारण करने का आधार माना गया है।
वही प्रकृति भक्तों को उसके पूरे जीवन में प्रसन्नता तथा धन-धान्य, पुत्र पौत्र, चिरकाल स्त्री, लक्ष्मी, आरोग्यता और आतातायियो से बचाती है । शक्ति शरण जी महाराज ने बताया कि मार्कंडेजी कहते हैं माता जब भक्ति से प्रसन्न होती है तो चार वरदान धन, आज्ञाकारी पुत्र ,धर्ममत रखती है और मृत्यु बाद मुक्ति प्रदान करती है। माता अपने भक्तों के एक पूजन में यह चार वरदान देती है। इस वर्ष जगदंबा का भारत की भूमि पर शुभ आगमन है और प्रस्थान भी शुभ है।

