न्यायालय पर बढे मुकदमों के बोझ को कम करना राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य:निरीक्षी न्यायमूर्ति

न्यायालय पर बढे मुकदमों के बोझ को कम करना राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य:निरीक्षी न्यायमूर्ति
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मोतिहारी। न्यायालय पर बढ़ रहे मुकदमों के बोझ को कम करने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय लोक अदालत का कॉन्सेप्ट बना है। इसके लिए न्यायाधिकरण की ओर से व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है, और इसका परिणाम भी मिलने लगा है।उक्त बातें शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित वर्ष 2026 का प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत समारोह के मुख्य अतिथि उच्च न्यायालय पटना के न्यायमूर्ति सह चंपारण मंडल के निरीक्षी न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा ने उद्घाटन उद्बोधन में कही।

वहीं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभिषेक कुमार दास ने कहा कि न्यायालय पर आस्था अच्छी बात है, लेकिन छोटे विवादों को दूर तक खींचना अच्छी नहीं है। वादकारी अपनी अंतरात्मा में झांक कर देखे कि वे न्यायालय में क्या खोया और क्या पाया। मानवीय संवेदनशीलता है कि वक्त के साथ आदमी को भी बदल जाना चाहिए।

वहीं कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश असरार अहमद ने कहा कि पारिवारिक विवाद दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। पति पत्नी के लड़ाई में बच्चे पिसते जा रहे हैं।जरूरत है लोगों के बीच जागरूकता एवं पारिवारिक प्रेम, बंधुत्व का प्रचार प्रसार व समाधान ढूंढा जाना चाहिए।

प्राधिकार के उपाध्यक्ष सह जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने कहा कि समाज का बनावट ऐसा है कि विवाद होना लाजमी है, परंतु उक्त छोटे विवादों को त्वरित समाधान कर दिया जाय तो छोटे फुंसी बड़े घाव नहीं बन सकते। वहीं पुलिस कप्तान स्वर्ण प्रभात ने जोर देकर निरीक्षी न्यायमूर्ति से कहा कि ट्रैफिक चालान विवाद को राष्ट्रीय लोक अदालत के दायरे में आने चाहिए।

जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष शेष नारायण कुंवर ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत मील का पत्थर बन गया है, पक्षकारों को इसका लाभ लेना चाहिए। वहीं संघ के महासचिव राजीव कुमार द्विवेदी उर्फ पप्पू दूबे ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन पक्षकार या उसके समर्थक बहुत ही उल्लास व आशा के साथ आते हैं कि उसके वादों का निष्पादन हो जाएगा। ऐसे में बेंच का दायित्व होता है कि वे वादों के निष्पादन में उदारता बरतें।

समारोह का संचालन षष्ठम अवर न्यायाधीश श्वेता सिंह व धन्यवाद ज्ञापन प्राधिकार के सचिव नितिन त्रिपाठी ने की। कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत 7 महिलाओं को सम्मानित किया गया। साथ ही अनुसूचित जाति कल्याण योजना के तहत 5 लाभुकों को विक्टिम कम्पनसेशन के अंतर्गत आर्थिक सहायता के रूप में चेक प्रदान किया गया तथा 5 दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल वितरित की गई।

आज की राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए कुल 27 बेंचों का गठन किया गया था, जिनमें सदर न्यायालय में 22 बेंच, अरेराज में 1 बेंच तथा ढाका में 4 बेंच शामिल थे। लोक अदालत में कुल 1000 न्यायालयीय वादों तथा 2000 बैंक से संबंधित मामलों का समझौते के आधार पर निष्पादन किया गया।

माप-तौल विभाग से कुल 92,000 रुपये की वसूली की गई तथा बैंकों के माध्यम से लगभग 7 करोड़ रुपये का समझौता कराया गया। उल्लेखनीय है कि अरेराज न्यायालय से 30 वर्ष पुराने वादों का भी सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।

कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारियों में मुकुंद कुमार, रेशमा वर्मा, राजविजय सिंह, ब्रजेश कुमार, ऋचा भार्गव, सूर्यकांत तिवारी, विद्या प्रसाद (एडीजे), प्रसेनजीत सिंह, राहुल रंजन, गरीमा रानी, अविनाश कुमार, नसीम नजर (एसीजेएम), गौरव सिंह, तौसीफुल अंसारी तथा अलका पांडे (जेएमएफसी) सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी एवं प्राधिकार के सहायक राजेश कुमार सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी व बड़ी संख्या में अधिवक्ता गण उपस्थित थे।

anand prakash

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