एमजीसीयू में जलवायु परिवर्तन,आर्थिक विकास व वित्त विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

एमजीसीयू में जलवायु परिवर्तन,आर्थिक विकास व वित्त विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
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पूर्वी चंपारण। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा “जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास, व्यापार एवं वित्त” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय श्रीवास्तव रहे, जबकि सह-संरक्षक के रूप में प्रो. शिरीष मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. सुब्रता रॉय द्वारा किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के प्रो. बिनय श्रेष्ठ,विशेष अतिथि के रूप में पटना विश्वविद्यालय के डॉ. नागेन्द्र कुमार झा, तथा सम्मानित अतिथि के रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. असीम मुखर्जी उपस्थित रहे।

बतौर वक्ता डॉ. सपना सुगंधा सहित विभाग के अन्य प्राध्यापकगण ने भी अपने विचार
अपने उद्घाटन संबोधन में कुलपति डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था प्रकृति और पर्यावरण से गहराई से जुड़ी हुई थी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विकास केवल मानव-केंद्रित न होकर पर्यावरण-केंद्रित होना चाहिए। नई शिक्षा नीति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्राथमिक स्तर से लेकर शोध तक पर्यावरणीय चेतना को केंद्र में रखती है। डॉ. सपना सुगंधा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल एक अकादमिक विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह मानव अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। उन्होंने ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया जो आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर चले। मुख्य अतिथि प्रो. बिनय श्रेष्ठा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज हर राष्ट्र की वास्तविकता बन चुका है। व्यापार और विकास की सभी गतिविधियों को पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर संचालित किया जाना चाहिए।

उन्होंने सतत विकास योजनाओं पर गंभीरता से कार्य करने का आह्वान किया। वही अतिथि डॉ. असीम मुखर्जी ने अपने भावनात्मक संबोधन में कहा कि पूर्वकाल में समाज प्रकृति को परिवार की तरह मानता था—भूमि, पेड़-पौधे और जंगल जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। उस समय समाज “हम” पर आधारित था, जबकि आज “मैं और तुम” की मानसिकता बढ़ रही है। उन्होंने चेताया कि तकनीकी रूप से हम भले ही दुनिया से जुड़ रहे हों, लेकिन भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं, जो पर्यावरण संकट को और गहरा बना रहा है।
विशेष अतिथि डॉ. नागेन्द्र कुमार झा ने कहा कि वित्त हमारे विकास का ईंधन है, व्यापार उसका माध्यम है और हमारा लक्ष्य समृद्धि, शांति तथा सुख है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थिरता के मूल उद्देश्य सामाजिक कल्याण और वैश्विक समृद्धि हैं तथा एक टिकाऊ विश्व के निर्माण के लिए आर्थिक गतिविधियों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ना आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन विषय से संबंधित पुस्तक के विमोचन एवं आयोजन समिति सदस्य डॉ. रविश चंद्र वर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। सम्मेलन में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

anand prakash

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