3.60 लाख करोड़ के रक्षा सौदे की मंजूरी
नयी दिल्ली। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अगले सप्ताह की भारत यात्रा से पहले सरकार ने वायुसेना के लिए फ्रांस से अतिरिक्त बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान राफेल की दो दशक से भी अधिक समय से लटकी पड़ी खरीद के प्रस्ताव को गुरुवार को हरी झंडी दिखा दी। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में 3.60 लाख करोड़ रुपये की लागत से राफेल लड़ाकू विमानों के साथ-साथ नौसेना के लिए आठ पी 8 आई टोही विमानों, मिसाइलों तथा स्यूडो सेटेलाइट की खरीद को भी मंजूरी दी गयी।
इन प्रस्तावों को आवश्यकता के आधार पर खरीद की मंजूरी दी गयी है। इन खरीद सौदों के पूरा होने से सशस्त्र बलों की युद्धक तैयारी तथा मारक क्षमता कई गुना बढ़ जायेगी। उल्लेखनीय है कि रक्षा खरीद बोर्ड ने पिछले महीने ही करीब सवा तीन लाख करोड़ रुपये की लागत से फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद को मंजूरी दी थी। अभी वायुसेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं।मंत्रालय ने बताया कि परिषद की बैठक में सेना के लिए टैंक रोधी सुरंगों (वैभव) और टी-72 टैंकों तथा इंफेन्ट्री के लिए युद्धक वाहनों की खरीद को भी मंजूरी दी गयी है। विमान की खरीद से संबंधित प्रस्ताव को अब केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति में भी मंजूरी दी जायेगी। सूत्रों के अनुसार इस सौदे में वायुसेना को 18 विमान पूरी तरह तैयार मिलेंगे, जबकि शेष 96 विमान भारत में ही बनाये जायेंगे और इनमें से कुछ विमान दो सीटों वाले भी होंगे, जिनका इस्तेमाल पायलटों को प्रशिक्षण में किया जायेगा। फ्रांस की डसॉल्ट एविऐशन द्वारा बनाया जाने वाला राफेल एक अत्याधुनिक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है जो हवा से हवा और हवा से जमीनी हमलों के साथ साथ निगरानी मिशन चलाने तथा परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
इस विमान को अत्याधुनिक मिसाइलों मेटियोर तथा स्कैल्प क्रूज से लैस रहता है और दूर से ही मार करने में सक्षम है। राफेल को विमानवाहक पोत से भी संचालित किया जा सकता है। अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद से वायुसेना के बेड़े में विमानों की कमी काफी हद तक पूरी हो जायेगी। वायु सेना के स्क्वैडूनों की स्वीकृत संख्या 42 है जबकि अभी उसके पास केवल 29 स्क्वैडून हैं। नये विमान पुराने मिग-21 विमानों की जगह लेंगे जिन्हें हाल ही में वायुसेना के बेड़े से विदा कर दिया गया था। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि राफेल विमानों की खरीद से संघर्ष के पूरे स्पेक्ट्रम में वायु सेना की प्रभुत्व स्थापित करने की क्षमता बढ़ेगी तथा लंबी दूरी के आक्रामक हमलों के माध्यम से उसकी प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि इस सौदे के तहत अधिकतर राफेल विमान भारत में ही बनाये जायेंगे। मंत्रालय ने कहा कि है कि कॉम्बैट मिसाइलें अत्यधिक सटीकता के साथ गहराई तक प्रहार करने की क्षमता रखती हैं और इससे स्टैंड-ऑफ ग्राउंड अटैक क्षमता सुदृढ़ होगी।
स्यूडो सेटेलाइट का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए निरंतर खुफिया, निगरानी एवं टोही, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग कार्यों के लिए किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा है कि सेना के लिए टैंकरोधी सुरंगों (विभव) की खरीद तथा आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल टी-72 टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (बीएमपी-2) के वाहन प्लेटफॉर्म के ओवरहॉल के लिए आवश्यकता के आधार पर स्वीकृति प्रदान की गयी है। विभव सुरंगों को शत्रु की यंत्रीकृत सेनाओं को आगे बढने से रोकने में बाधा पहुंचाने के लिए टैंक रोधी प्रणाली के रूप में बिछाया जाएगा। टी-72 टैंक और बीएमपी-क्क्रके वाहन प्लेटफॉर्म के ओवरहॉल से उपकरणों की सेवा आयु बढ़ेगी तथा भारतीय थलसेना की तत्परता और परिचालन प्रभावशीलता सुनिश्चित होगी। बैठक में भारतीय तटरक्षक बल के डोर्नियर विमान के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड प्रणाली की खरीद को भी मंजूरी दी गई।

