निजी स्कूलो के मनमानी और बाध्यकारी नियमो पर डीएम ने कसा नकेल

निजी स्कूलो के मनमानी और बाध्यकारी नियमो पर डीएम ने कसा नकेल
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मोतिहारी। जिला दंडाधिकारी सह जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने निजी स्कूलो के मनमानी और बाध्यकारी नियमो के विरूद्ध कठोर आदेश जारी किया है। आदेश कहा गया है,कि मितव्ययी, गुणवत्तापूर्ण एवं सर्व सुलभ शिक्षा व्यवस्था का निर्माण लोक कल्याणकारी प्रशासन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक है। हाल के दिनों में मीडिया और निजी स्कूलो में पढ रहे छात्रो के अभिभावको और विभिन्न सामाजिक संगठनों से यह शिकायत मिला है,कि जिले के निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से मनमाना शुल्क के साथ-साथ अन्य शैक्षणिक सामग्रियों की भी अत्यधिक कीमत वसूली की जा रही है।

इन निजी स्कूलों के संचालकों द्वारा पुस्तकें, यूनिफॉर्म, बैग, जूते, कॉपियां आदि अत्यधिक महंगी कीमत पर बेची जा रही हैं तथा अभिभावकों को केवल निर्धारित दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, जिससे उन्हें खुले बाजार से सस्ती चीजें खरीदने की स्वतंत्रता नहीं मिल पाती है।

निजी स्कूलो के इस मनमाने और एकाधिकारी प्रवृत्ति के कारण गरीब वर्ग के अभिभावको पर अनुचित और भारी आर्थिक खर्च का बोझ पड़ रहा है, जिससे विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को अत्यन्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

जिलाधिकारी ने आदेश में कहा है,कि ऐसी भी सूचना मिली है,कि निजी विद्यालय स्टेशनरी व यूनिफॉर्म विक्रेता आपसी सांठगांठ से पुस्तकों एवं अन्य सामग्रियों का अत्याधिक मूल्य तय करते हैं, जिससे यह स्थिति पूर्णतया शोषणकारी बन गई है। विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि यह एकाधिकारी प्रवृत्ति समाज में असंतोष तथा अशांति का कारण बन सकती है तथा लोक शांति में विघ्न की आशंका उत्पन्न हो सकती है।

इन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए तथा जनहित, शांति व्यवस्था एवं विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने हेतु जिलाधिकारी-सह-जिला दंडाधिकारी, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं।

इस आदेश के अनुसार कोई भी विद्यालय संचालक अथवा प्राचार्य विद्यार्थियों को विद्यालय की यूनिफार्म, जूते, टाई, पाठ्यपुस्तकें, कापियाँ अथवा अन्य स्टेशनरी सामग्री किसी एक ही दुकान या विक्रेता से क्रय करने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। सभी निजी विद्यालयों के संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अपने विद्यालय में संचालित प्रत्येक कक्षा हेतु अनिवार्य पुस्तकों की सूची एवं यूनिफार्म का विवरण दिनांक 10 फरवरी 2026 के पूर्व विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए तथा विद्यालय परिसर के किसी सार्वजनिक एवं दृश्य स्थान पर चस्पा किया जाए।

आदेश में यह भी निर्देशित किया गया है कि विद्यालय प्रशासन द्वारा यूनिफार्म का निर्धारण इस प्रकार किया जाएगा कि उसमें कम से कम तीन वर्षों तक कोई परिवर्तन न हो, जिससे अभिभावकों पर बार-बार नए यूनिफार्म खरीदने का आर्थिक बोझ न पड़े। इस आदेश का उल्लंघन किए जाने पर संबंधित व्यक्ति, संस्था अथवा आयोजक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा-223 के अंतर्गत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। विद्यालय द्वारा आदेशों की अवहेलना की स्थिति में विद्यालय के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक तथा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के समस्त सदस्य व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी माने जाएँगे।

उक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है एवं दिनांक 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावशील रहेगा। जिला प्रशासन ने सभी निजी विद्यालयों से अपील की है कि वे इन आदेशों का कड़ाई से पालन करें तथा अभिभावकों एवं विद्यार्थियों के हितों का ध्यान रखते हुए शिक्षा को सुलभ एवं किफायती बनाने में सहयोग प्रदान करें। जिला प्रशासन इस आदेश के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा तथा किसी भी उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

anand prakash

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