चुनाव प्रचार का थमा शोर,दुसरे चरण के 122 सीटों पर अब जोर आजमाइश हुआ तेज
दूसरे चरण के 122 सीटों पर अब जोर आजमाइश तेज
-चार सीट पर राजद-कांग्रेस और एक सीट पर सीपी आई-कांग्रेस आमने-सामने
-राजद 72,कांग्रेस 37 सीटों पर तो बीजेपी 57,जद यू 44 सीटों पर चुनाव मैदान में
पटना।11 नवंबर को बिहार विधान सभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिये चुनाव प्रचार के लिये अब 24 घंटे से भी कम का समय रह गया है। 20 जिलों के 122 सीटों पर हो रहे इस चुनाव में अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिये जी-जान से जुटे है। बिहार में एनडीए गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत सभी बड़े नेताओं ने तूफानी दौरा शनिवार को जारी रखा। दूसरे फेज के चुनाव में बीजेपी 57, जद यू 44 लोजपा आर 15 हम 6 और आरएलएम 4 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
एनडीए गठबंधन के अन्य नेताओ चाहे वह नीतीश कुमार हो या जीतनराम मांझी, चिराग पासवान, उपेन्द्र कुशवाहा सभी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। यही वजह है कि कभी एक दूसरे को फूंटी आंख से नहीं सुहाने वाले जीतन राम मांझी और चिराग पासवान शनिवार को एक दूसरे के उमीदवार को जिताने के लिये चुनावी सभा किया।
दूसरी तरफ महागठबंधन में शामिल राजद ने 72 सीटों पर कांग्रेस ने 37 माले ने 6 तो सीपीएम ने एक और सीपीआई ने 4 सीटों पर अपना उममीदवार उतारा है। जिसमें कहलगांव, सुल्तान गंज और सिकंदरा और वारिसली गंज में कांग्रेस और राजद के उममीदवार एक दूसरे के आमनेसामने हैं तो करगहर में कांग्रेस के खिलाफ सीपीआई ने अपना उमीदवार मैदान में उतारा है। यानि 4 सीटों पर गठबंधन के दल अपने विरोधियो के बदले सहयोगियों से ही फरियाने में लगे हैं।
महागठबंधन का भी चुनाव प्रचार जोरों पर है। तेजस्वी यादव अपने उम्मीदवारों के अलावा गठबंधन के प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिये एक दिन में 18 चुनावी सभायें कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही भागलपुर, सुल्तानगंज और सिकंदरा सीट पर राहुल और तेजस्वी अलग-अलग चुनाव प्रचार कर अपने प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने में लगे हैं।
दूसरे फेज के चुनाव में 2020 में जद यू ने 20 सीटों पर चुनाव जीता था तो 12 पर दूसरे स्थान पर रही थी। वही 5 सीटों पर हम ने कब्जा किया था। जबकि लोजपा आर और आर एल एम का खाता भी नहीं खुला था।
20 जिलों के 122 सीटों पर हो रहा यह चुनाव में एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिये काफी महत्वपूर्ण है। एक तरफ सीमांचल और मध्य बिहार का इलाका महागठबंधन के लिए काफी महत्वपूर्ण है और
इन क्षेत्रो में 2020 में भी यहां जनता ने महागठबंधन को भारी जीत दिलायी थी। वहीं चंपारण का इलाका हो या मिथिलांचल या फिर कोशी का इलाका। वहां पर एनडीए गठबंधन को भारी सफलता हासिल हुई थी और नीतीश एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने में कामयाव रहे थे। हालांकि 2020 के विधान सभा चुनाव में चिराग पासवान के अलग रहने और जद यू उम्मीदवार के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतारने की वजह से जद यू को भारी नुकसान हुआ था और उसकी कई परंपरागत सीट ही नहीं मध्य बिहार में खाता खुलना भी मुश्किल हो गया था।
इस बार सूरत बदली हुई है और चिराग और उपेन्द्र कुशवाहा दोनों एनडीए गठबंधन में है। ऐसे में एक एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए एन डी ए ने पूरी ताकत झोंक दी है। दूसरी तरफ महागठबंधन को भी मुकेश सहनी ओर आई पी गुप्ता का साथ मिलने से 2020 में मिली जीत को बरकरार रखने की उममीद है। यही वजह कि तेजस्वी यादव समेत महागठबंधन के अनेक नेता चुनावी अभियान में जी जान लगाये हुए है। अब चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में इन नेताओं की मिहनत कितना रंग दिखलाता है यह तो 14 नवंबर को ही पता चलेगा।

