कल्याणपुर विधान सभा में वोटरों को साधने में जुटे कैंडिडेड
-जीत का दावा सबका, शह मात को लेकर कसरत जारी
मोतिहारी। पूर्वी चंपारण का 16 कल्याणपुर विधान सभा कई मायनों में हर बार अलग इतिहास रचता आया है। चुनाव के परिदृश्य में यहां हर बार नए नए समीकरण बनते और बिगड़ते है। यह सीट लोकसभा में अलग रंग दिखाता है तो विधान सभा के चुनाव में रंग बदलते रहता है। आंकड़े देखे तो हर बार इस क्षेत्र में एमपी के चुनाव में एनडीए को लीड मिलता है। 2019 में ही तकरीबन 14 हजार से अधिक का लीड था, जबकि विधान सभा में राजद के मनोज कुमार यादव कड़े मुकाबले में चुनाव जीत गए।
इतिहास गवाह है कि यहां अबतक कोई विधायक लगातार दूसरी बार जीत दर्ज नहीं किया है। ऐसे में इस बार भी यहां के पब्लिक का मूड भापना मुश्किल है। 2015 के चुनाव में एनडीए के तत्कालीन कंडीडेट भाजपा के सचिंद्र प्रसाद सिंह 12 हजार से अधिक के अंतर से जदयू की रजिया खातून को मात दिए थे। वही 2020 में कड़ी टक्कर में 1193 वोट से राजद के प्रत्याशी ने उन्हें शिकस्त दी थी। इधर वोटरों की संख्या की बात करे तो पिछले 5 साल में मामूली इजाफा हुआ है। 2019 – 20 में 2. 56 लाख वोटर थे, जो 2024 में लगभग 2.65 लाख हुए है। अर्थात पिछले 5 साल ने 9 हजार वोटर बढ़े है। इस बार के चुनाव में 11 कैंडिडेट चुनावी अखाड़े में अपना अपना ताल ठोक रहे है। इसमें बहुत सारे लोग जातीय समीकरण को साधने में लगे है तो विकास किए जाने और विकास करेंगे के दावों-वादों पर भी वोट मांगे जा रहे है। जानकार बताते है कि मुकाबला आमने- सामने की संभवाना जताई जा रही है, परन्तु जनसुराज एवं बसपा जैसे दलो से मैदान में उतरे सरीखे कई उम्मीदवार सीधी मुकाबले में बाधक दिख रहे है। फिलहाल सभी अपनी जीत का दावा कर रहे है और चुनाव प्रचार में पूरा दमखम लगा दिए है। यहां जातीय समीकरण को साधने के पीछे भी प्रत्याशी लगे है, और अन्य जाति के वोटरों को भी अपने पाले में लाने का कसरत चल रहा है। 11 नवंबर को कल्याणपुर विधान सभा का चुनाव है, ऐसे में अब सभी पार्टी और उम्मीदवार अपनी पूरी ऊर्जा लगाकर वोटरों को साधने में लग गए है, बहरहाल 14 नवंबर को ही परिणाम आने के बाद दिखेगा, कि फिर से यहां कौन सा नया इतिहास रच गया।
प्रभात रंजन मुन्ना की रिपोर्ट

