पूर्वी चंपारण में गंडक, बागमती व बूढ़ी गंडक खतरे के निशान के पार 

पूर्वी चंपारण में गंडक, बागमती व बूढ़ी गंडक खतरे के निशान के पार 
Facebook WhatsApp

बाल्मीकी नगर बराज से 3 बार में कुल 16 लाख 39 हजार 800 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज, खतरा बढ़ने की संभावना।

मोतिहारी। नेपाल में हो रही घनघोर बारिश के कारण बिहार में बहने वाली गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक नदियों के जलग्रहण क्षेत्र लगातार वृद्धि जारी है। सोमवार 28 सितंबर की शाम तक उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक,  गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज से सुबह 5  बजे अधिकतम 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके बाद प्रशासन ने सभी तटबंधों की निगरानी बढा दी है।

पूर्वी चंपारण में अरेराज के चटिया गेज पर सोमवार दोपहर 2 बजे जलस्तर 68.20 मीटर था, जबकि चेतावनी स्तर 68.15 मीटर है। यानी गंडक खतरे के निशान से 5 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, लिहाजा जिले के अरेराज, संग्रामपुर, केसरिया, गोविंदगंज क्षेत्र के गंडक तटवर्ती इलाके साहेबगंज की ओर जाने वाले निचले क्षेत्र भी आगे प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने गंडक तटवर्ती सभी गांवो में विशेष चौकसी बरतने का निर्देश दिया है। 

वहीं, जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, बूढ़ी गंडक नदी सोमवार शाम पश्चिम चंपारण के चनपटिया में जलस्तर चेतावनी स्तर 72.68 के उपर 73.64 मीटर थी। नतीजतन इसका असर पूर्वी चंपारण में मुख्यतः निचले इलाके में होने की संभावना है। वहीं लालबकेया नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, गुआबारी में लालबकेया खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। फलस्वरूप, पूर्वी चंपारण के नेपाल सीमा से लगे तथा लालबकेया तटबंध के आसपास के निचले इलाकों पर विशेष निगरानी बरती जा रही है। 

जल प्रवाह को देखते हुए सोमवार को बाल्मीकिनगर बराज से सुबह 5 बजे 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, इसके अतिरिक्त 7  बजे सुबह में 497200, जबकि 9 बजे 44,9100 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस तरह से सुबह 5 से लेकर 9 बजे दिन की बात की जाए तो 16 लाख 39 हजार 800 क्यूसेक पानी गंडक नदी में छोड़ा गया है, जिसका प्रभाव पूर्वी चंपारण के गंडक तटवर्ती इलाकों पर पड़ने की पूरी संभावना दिखने लगी है। बिहार जल संसाधन विभाग के रियल-टाइम आंकड़े में अरेराज प्रखंड के चटिया गंडक स्टेशन पर 28 सितंबर दोपहर 2 बजे जलस्तर 68.20 मीटर था, जबकि चेतावनी स्तर 68.15 मीटर है।

यहां नदी चेतावनी स्तर से ऊपर और बहती हुई दर्ज हुई है। पूर्वी चंपारण में खासकर अरेराज अनुमंडल के गंडक दियारा और निचले तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा वास्तविक रूप से बढ़ गया है। रिपोर्टों में अरेराज क्षेत्र को विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है।

anand prakash

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page