डीएलएस ने लोगों को दी नागरिक कानून की जानकारी
मोतिहारी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, के तत्वावधान में एनपीएस बिरता टोला, वार्ड संख्या 29, रघुनाथपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 एवं नागरिकों के मौलिक कर्तव्य” रहा। कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता पूनम कुमारी वर्मा एवं उज्जवल कुमार द्वारा उपस्थित लोगों को सरल एवं व्यवहारिक भाषा में उनके कानूनी अधिकारों, संवैधानिक कर्तव्यों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की भूमिका के संबंध में जानकारी दी गई।
-सूचना का अधिकार अधिनियम की दी गई जानकारी
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को लोक प्राधिकरणों के पास उपलब्ध सरकारी अभिलेखों एवं सूचनाओं तक पहुंच का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। लोगों को समझाया गया कि वे किसी सरकारी योजना, आवेदन, निर्माण कार्य, स्वीकृत राशि, कार्यादेश, भुगतान विवरण अथवा किसी सरकारी कार्यालय में लंबित आवेदन से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों की जानकारी संबंधित लोक सूचना अधिकारी से मांग सकते हैं। यह भी बताया गया कि आवेदन के लिए कठिन कानूनी भाषा की आवश्यकता नहीं है। सामान्य मामलों में सूचना उपलब्ध कराने की समय-सीमा 30 दिन है, जबकि किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित सूचना के मामले में 48 घंटे का प्रावधान है।
मौलिक अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक
भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की भी जानकारी दी गई। उपस्थित लोगों को समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार तथा संवैधानिक उपचार के अधिकार के बारे में उदाहरण देकर समझाया गया। बताया गया कि कानून की नजर में सभी व्यक्ति समान हैं तथा जाति, धर्म, लिंग या जन्मस्थान जैसे आधारों पर अनुचित भेदभाव संविधान के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। बच्चों के संदर्भ में बताया गया कि 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। मानव तस्करी, बेगार एवं जबरन मजदूरी के निषेध तथा बच्चों को खतरनाक रोजगारों से संरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों की भी जानकारी दी गई।
– मौलिक कर्तव्यों की दी गई जानकारी
संविधान के अनुच्छेद 51। के अंतर्गत वर्णित नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। लोगों को संविधान, राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रगान का सम्मान करने, देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने, सामाजिक सद्भाव और भाईचारा बढ़ाने, महिलाओं की गरिमा का सम्मान करने, सांस्कृतिक विरासत एवं पर्यावरण की रक्षा करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करने के लिए प्रेरित किया गया। अभिभावकों को यह भी बताया गया कि 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना भी एक संवैधानिक कर्तव्य है। इस अवसर पर कहा गया कि “अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों और अपने संवैधानिक कर्तव्यों का भी सम्मान करे।”
– डीएलएस के कार्यों एवं निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की भूमिका के संबंध में भी लोगों को जागरूक किया गया।
बताया गया कि डीएलएस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक, सामाजिक अथवा अन्य कठिनाइयों के कारण कोई पात्र व्यक्ति न्याय से वंचित न रह जाए। इसके माध्यम से पात्र व्यक्तियों को परिस्थितियों के अनुसार निःशुल्क विधिक सलाह, अधिवक्ता की सहायता, न्यायालयीन कार्यवाही में कानूनी सहायता, लोक अदालत के माध्यम से समझौता योग्य विवादों के समाधान तथा विधिक जागरूकता एवं मार्गदर्शन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अतिरिक्त लोगों को असंगठित क्षेत्र के कामगारों, वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों, एसिड अटैक पीड़ितों, दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संबंधित विधिक सेवा योजनाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई।
-जरूरतमंद व्यक्तियों से कहा गया कि वे विधिक सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही एनएएलएसए की टोल-फ्री कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 की जानकारी भी साझा की गई। कार्यक्रम का समापन विधिक जागरूकता के संदेश तथा “न्याय सबके लिए” की भावना के साथ किया गया।

