पूर्वी चंपारण: विभिन्न पार्टियो के कई दिग्गज इस बार पाला बदलकर ठोक रहे ताल
-भाजपा, जदयू, राजद सहित जनसुराज के नेता शामिल
-पूर्व एमएलसी बब्लू गुप्ता, डाॅ. अतुल, दिव्याशु भारद्वाज, पीपरा से राजद के सुबोध यादव, जनसुराज के पूर्व जिलाध्यक्ष रामशरण यादव सहित अन्यों के पाला बदलने से मुकाबला रोचक होने की संभावना
मोतिहारी। जिले में करीब आधा दर्जन नेता चुनाव में टिकट नही मिलने पर पाला बदलकर दुसरे दलो के टिकट या निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है। हालांकि इनमें ज्यादातर एनडीए गठबंधन के भाजपा व जदयू सहित राजद के नेता शामिल है। ऐसे नेता दल से टिकट मिलने की आस में क्षेत्रों दौरा आदि कर लोगों को इस बार अपनी ओर आकर्षित करने में जुटे रहे। लेकिन अंतिम क्षण में जब पार्टी का सिंबल नहीं मिला, फलरूवरूप दूसरे दल एवं निर्दलीय ताल ठोकते नजर आ रहे है। इसमें पूर्व विधायक, पूर्व एमएलसी, पूर्व पार्टी जिला अध्यक्ष, पूर्व प्रत्याशी के नाम शामिल हैं, बात पहले हम सुगौली विधानसभा से ही कर लें तो बीजीपी में सक्रिय भूमिका निभाने वाले पूर्व एमएलसी बबलू गुप्ता का नाम अब तो सुर्खिया बटोर रहे है। भाजपा में रहते हुए एमएलसी का चुनाव जीते, फिर हारे। सुगौली विधानसभा से पिछले कई वर्षो से वे राजनीति कर रहे थे। लोगों के सुख-दुख में शामिल होकर लोगों के बीच भाजपा से उम्मीदवारी की संभावना भी जता रहे थे। लेकिन ऐन वक्त पर सीट लोजपा आर के खाते में चली गई, सो वे सुगौली विधानसभा सीट से एनडीए समर्थित लोजपा आर की टिकट पर लड़ रहे है।
इस सीट से महागठबंधन बहुत बड़ा झटका लगा है, निर्वतमान विधायक ई. शशि सिंह, राजद प्रत्याशी रहे ओम प्रकाश चौधरी निर्दलीय का नामांकन पत्र में त्रुटि होने के कारण अस्वीकृत कर दिया गया। जाहिर है कि इस सीट से महागठबंधन का अभी को अधिकृत प्रत्याशी नहीं है, दीगर है कि महागठबंधन वहां किसी दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार पर दांव लगायेगा, लेकिन जो क्षति महागठबंधन को होते दिख रही है, उसकी भरपाई महागठबंधन कैसे कर पाता है, समय के साथ जाना जायेगा।
इसी तरह पीपरा विधानसभा सीट को देखने से लग रहा है। यहां राजद की टिकट पर चुनाव लड़ चुके सुबोध यादव, इस बार जनसुराज पार्टी से लड़ रहे है। यहां की सीट कम्युनिष्ट उम्मीदवार के खाते में चली गई है।
जबकि समता पार्टी काल से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद उर्फ भूवन पटेल इस बार टिकट नही मिलने की संभावना को भांप कांग्रेस में शामिल होकर कांग्रेस की टिकट पर रक्सौल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। हैरतअंगेज बात तो मोतिहारी विधानसभा में दिख रही है। जहां भाजपा-जदयू के दो-दो दिग्गज नेता मैदान में दिख रहे है। भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष डॉ. अतुल कुमार जनसुराज से लड़ाई का शंखनाद कर दिए है, तो जदयू यूथ विंग के चर्चित नेता व पूर्व युवा प्रदेश अध्यक्ष एवं पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के नेता दिव्यांशु भारद्धाज को एनडीए ने टिकट नही दिया। उनका कहना है कि यहां से चुनाव लड़ाने का भरोसा पार्टी के शीर्ष नेताओं ने दिया था। नतीजतन नेताओं से मिले आश्वासन के बाद पिछले दो-तीन वर्षो से मोतिहारी विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा हूं। फलस्वरूप वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में है। खास बात है कि इनके निर्दलीय होने के बाद भी कुछ खास बाते सामने आ रही है। पोस्टर बैनर एवं जारी बुक में मोदी-नीतीश कुमार की तस्वीर छपी हुई है। वहीं स्लोगन भी छपा है। जिसकी खूब चर्चा हो रही है। इसके अतिरिक्त पूर्व विधायक एवं मंत्री रहे जदयू के कद्दावर नेता श्याम बिहारी प्रसाद जदयू छोड़ कांग्रेस की टिकट पर रक्सौल विधानसभा सीट से ताल ठोकते नजर आ रहे है।
केसरिया विधानसभा क्षेत्र में कालांतर से कम्युनिष्ट, राजद सहित अंततः जनसुराज से राजनीति कर रहे रामशरण यादव को पूरा भरोसा था, कि प्रशांत किशोर उनको चुनाव लड़ने का अवसर देंगे, चुकिं जनसुराज के शुरूआती दौर से जिलाध्यक्ष रहते हुए उन्होने समूचे जिलेभर में जनसुराज से लोगों को जोड़ने में अपनी भूमिका निभाई है। अब अंतिम क्षण में उन्हे पार्टी की ओर से टिकट नहीं मिला, नतीजतन वे निर्दलीय मैदान में दिख रहे है। चिरैया विधानसभा भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति है। इस बार अच्छेलाल यादव के बदले पार्टी ने पुराने प्रत्याशी एवं वहां से विधायक रहे लक्ष्मीनारायण यादव पर भरोसा जताया है। जबकि अच्छे लाल यादव ने भी नामांकन दाखिल कर चुनाव में हैै।
मधुबन में भी पूर्व के राजद प्रत्याशी मदन साह उम्मीदवारी से वंचित कर दिया गया, वे भी मैदान में निर्दलीय है। अन्य कई दलो के बागी भी विभिन्न विधानसभाओ में दलीय/निर्दलीय नामांकन दाखिल कर समीक्षा भी कर चुके है, ऐसे में कितने ऐसे नेता मैदान में अंतिम क्षणो तक रहेंगे, इसका खुलासा गुरूवार को नामांकन पत्र वापसी के बाद हो जायेगा। दिलचस्प है कि मोतिहारी विधानसभा से राजद प्रत्याशी देवा गुप्ता एवं उनकी मेयर पत्नी प्रीति गुप्ता बतौर बुधवार तक निर्दलीय मैदान में दिख रही है। अलबत्ता अंतिम क्षण में अगर वह नामांकन वापस ले लेती है तो पति देवा गुप्ता राजद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में रहेंगे।

