परिवीक्षा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने की समीक्षा
– जेल में भार कम करने के उद्देश्य से कम गंभीर मामलों की समीक्षा पर जोर
मोतिहारी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मोतिहारी के तत्वावधान में सर्वोच्च न्यायालय एवं पटना उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित निर्देशों के आलोक में परिवीक्षा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन एवं लाभार्थियों को इसका समुचित लाभ सुनिश्चित करने करने को लेकर समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलेश चन्द्र मिश्रा ने की। बैठक में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पुनीत कुमार तिवारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव नितिन त्रिपाठी, मंडल कारा के प्रतिनिधि तथा परिवीक्षा विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रधान परिवीक्षा पदाधिकारी संजीव राहुल, परिवीक्षा पदाधिकारी धीरज कुमार उपाध्याय, सिकरहना के परिवीक्षा पदाधिकारी अभिषेक कुमार दिवाकर, परिवीक्षा पदाधिकारी अतुल रंजन एवं परिवीक्षा पदाधिकारी श्याम कुमार ने सहभागिता निभाई। .
इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय एवं पटना उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप परिवीक्षा अधिनियम के प्रभावी अनुपालन, पात्र अभियुक्तों के मामलों में समयबद्ध परिवीक्षा प्रतिवेदन उपलब्ध कराने, न्यायालयों एवं परिवीक्षा विभाग के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा सुधारात्मक न्याय की अवधारणा को सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
अध्यक्ष ने कहा कि परिवीक्षा अधिनियम का उद्देश्य प्रथम बार अथवा कम गंभीर अपराध करने वाले पात्र व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके पुनर्वास का अवसर प्रदान करना है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से जेलों पर अनावश्यक भार कम होगा तथा सुधारात्मक न्याय की भावना को बल मिलेगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि परिवीक्षा प्रतिवेदनों की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी, जबकि न्यायालयों, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कारा प्रशासन एवं परिवीक्षा विभाग के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

