आपातकाल केवल इंदिरा गांधी की कुर्सी बचाने के लिए लगाया गया था: रविशंकर प्रसाद

आपातकाल केवल इंदिरा गांधी की कुर्सी बचाने के लिए लगाया गया था: रविशंकर प्रसाद
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं सांसद रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि आपातकाल केवल इंदिरा गांधी की कुर्सी बचाने के लिए लगाया गया था। पार्टी मुख्यालय में आयोजित पपत्रकार वार्ता में उन्होंने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे दुखद और काला अध्याय बताया।उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का चुनाव निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ इंदिरा सुप्रीम कोर्ट गई, लेकिन उन्हें पूर्ण राहत नहीं मिली। जब यह घटनाक्रम हुआ, तब इंदिरा गांधी को बचाने की कोशिशें शुरू हुईं और इसी क्रम में आपातकाल लगाया गया।

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आपातकाल के 50 साल पूरे हो गए हैं। आज देश में लोकतंत्र बचाने की बात की जाती है, संविधान दिखाया जाता है। ऐसे में उन चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है 50 साल पहले क्या हुआ था। उन्होंने कहा कि वे जेपी आंदोलन के एक सेनानी थे । मीसा के तहत बंदी भी रहे और आपातकाल के खिलाफ संघर्ष किया। इसलिए उस दौर की घटनाओं को प्रत्यक्ष रूप से याद कर सकते हैं। जिस तरह जेल में अत्याचार किया गया, उस पर कई पत्रकारों ने किताबें लिखी हैं।

उन्होंने पत्रकार कूमी कपूर की पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि बंदियों को टीन की छत वाले कमरों में रखा जाए ताकि वे गर्मी और असुविधा से परेशान रहें। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में राजनीतिक कैदियों को प्रताड़ित किया गया और कई स्थानों पर उनके साथ अमानवीय व्यवहार हुआ। रविशंकर प्रसाद ने जबरन नसबंदी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में सरकारी कर्मचारियों पर नसबंदी के लक्ष्य पूरे करने का दबाव डाला गया। उनके अनुसार, पदोन्नति और अन्य लाभों को भी नसबंदी अभियान से जोड़ दिया गया था, जिसके कारण कई जगहों पर लोगों को जबरन नसबंदी के लिए मजबूर किया गया। जिनकी शादी भी नहीं हुई थी, उनकी भी नसबंदी करवाई गई। यह मानवता के खिलाफ किया गया हमला था।

मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दिल्ली स्थित कई प्रमुख समाचार पत्रों के कार्यालयों की 24 जून की रात बिजली काट दी गई थी ताकि अखबार प्रकाशित न हो सकें। उन्होंने कहा कि उस समय सेंसरशिप लागू थी। आपातकाल में एक चीफ सेंसर ऑफिसर था, जिसके अप्रूवल के बिना कोई समाचार नहीं छपता था, और निर्देश था कि संजय गांधी की देशभर में यात्रा ही सबसे महत्वपूर्ण खबर बनेगी। उन्होंने आपातकाल में अंडरग्राउंड रहते हुए प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की तारीफ की।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर सहित अनेक पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया। कई अखबारों ने विरोधस्वरूप अपने संपादकीय कॉलम खाली छोड़ दिए थे। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के उस प्रसिद्ध कथन का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि जब कुछ पत्रकारों से झुकने के लिए कहा गया, तो वे दंडवत करने लगे। इसके बावजूद कुछ अखबारों और पत्रकारों ने साहस दिखाया।

anand prakash

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