ग्रामीण आजीविका गारंटी मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरुकता जरूरीः डीएम
मोतिहारी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आजीविका सुरक्षा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले “विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण); वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समाहरणालय मोतिहारी स्थित डॉ. राजेंद्र सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है।
इस कार्यशाला में पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज एवं शिवहर के कुल 51 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम (कार्यशाला) का शुभारंभ जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव, अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा और उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर के द्वारा दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 01 जुलाई 2026 से उक्त अधिनियम पूरे बिहार में लागू हो रही है। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण में उपस्थित पदाधिकारीगण को संबोधित करते हुए कहा कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य है कि लोगों को ग्रामीण स्तर पर ही रोजगार मिले और इसके लिए ग्रामीण स्तर पर रोजगार का अधिकतम सृजन किया जा सके।
पूर्वी चंपारण जिला में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, इसका मुख्य उद्देश्य इस अधिनियम को प्रभावी और पारदर्शी तरीके से धरातल पर लागू करना है ताकि, 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका सुरक्षा और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।
नए अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी दी जाएगी। यदि आवेदन के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो संबंधित परिवार को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। साथ ही मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक अथवा अधिकतम 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। भुगतान में विलंब होने पर निर्धारित प्रावधानों के तहत क्षतिपूर्ति भी दी जाएगी।

प्रशिक्षण में बताया गया कि योजना के अंतर्गत कुल 318 प्रकार के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें जल संरक्षण एवं सुरक्षा से जुड़े 107 कार्य, ग्रामीण आधारभूत संरचना के 90 कार्य, आजीविका अवसंरचना के 86 कार्य तथा जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित 35 कार्य शामिल हैं। इस अधिनियम अंतर्गत व्यक्तिगत लाभार्थी आधारित योजनाओं और परिसंपत्तियों के रख रखाव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को पंचायत स्तर पर जन-जागरूकता अभियान, क्षमता निर्माण, डिजिटल प्रणाली के प्रभावी उपयोग और विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि 1 जुलाई से इस योजना का सफल एवं प्रभावी संचालन किया जा सके।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त ने कहा कि अधिनियम में जो बातें अंतर्निहित हैं उसको प्रभावित तरीके से धरातल पर लागू करने का प्रयास किया जाएगा और इसमें कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय पदाधिकारी को इसमें लापरवाही का अवसर नहीं मिलेगा और ऐसा पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इस अवसर पर निदेशक एनईपी डॉ कुंदन कुमार एवं जिला प्रोग्राम पदाधिकारी राजेश कुमार भी उपस्थित थे।

