मानव तस्करी के खिलाफ बिहार सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति : सम्राट चौधरी
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को कहा कि बच्चों का लापता होना और मानव तस्करी सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। बिहार सरकार मानव तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।तस्करी की रोकथाम के साथ पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री पटना के ज्ञान भवन में गृह विभाग की ओर से आयोजित ‘गुमशुदा बच्चों और मानव तस्करी’ विषयक पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मानव तस्करी की रोकथाम के लिए रोजगार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। लोगों को रोजगार के सुरक्षित और वैध अवसर उपलब्ध कराने से मानव तस्करी के जोखिम को कम किया जा सकता है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि ‘नया सवेरा 3.0’ अभियान के माध्यम से मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता, रोकथाम, बचाव और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि तस्करी से मुक्त कराए गए प्रत्येक व्यक्ति को केवल राहत ही नहीं, बल्कि कौशल, रोजगार और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में बिहार सरकार संबंधित राज्यों, पुलिस, प्रशासन, न्यायपालिका और सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय कर काम करेगी, ताकि मानव तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और बच्चों एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने बताया कि बिहार में महिलाओं की पुलिस बल में बड़ी भागीदारी है तथा राज्य में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट का गठन किया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि लापता बच्चों और व्यक्तियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई को समयबद्ध बनाने के लिए बिहार में रियल टाइम मॉनीटरिंग की व्यवस्था की गई है। इसके तहत राज्य में अब तक 1,200 से अधिक लापता बच्चों की रिकवरी की जा चुकी है।
सम्राट चौधरी ने बताया कि लोगों की शिकायतों का 30 दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए ‘सहयोग शिविर’ आयोजित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से अब तक छह लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 5.50 लाख से अधिक मामलों का निष्पादन कराया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि मामलों के निष्पादन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। यदि किसी पीड़ित को अधिकारी स्तर पर न्याय नहीं मिलता या लोग कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होते हैं तो प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को वह स्वयं ऐसे मामलों की सुनवाई करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ‘राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ में ऐसे 129 आवेदन उनके समक्ष आए थे, जिनमें से 100 आवेदकों से संबंधित मामलों का समाधान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास को और गति देने के लिए सरकार बाढ़ जैसी चुनौतियों का भी स्थायी समाधान तलाश रही है। उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या कम करने के लिए जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं।उन्होंने कहा कि राज्य में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया गया है। साथ ही गंगा, गंडक (नारायणी) और कोसी जैसी प्रमुख नदियों को जोड़ने तथा जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए. अमानुल्लाह, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद, बिहार के महाधिवक्ता एसडी संजय, उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित मानक कार्य प्रणाली निर्माण समिति की अध्यक्ष एवं केंद्र सरकार की एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे तथा दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहित जे. शाह सहित अन्य न्यायाधीश भी उपस्थित रहे।

