कलयुग में दिखे श्रवण कुमार, कांवड़ में बैठाकर माता-पिता को ले जा रहा परिवार बना आकर्षण का केंद्र

कलयुग में दिखे श्रवण कुमार, कांवड़ में बैठाकर माता-पिता को ले जा रहा परिवार बना आकर्षण का केंद्र
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हरिद्वार। कांवड़ यात्रा के दौरान धर्मनगरी हरिद्वार में मातृ-पितृ भक्ति का ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं और राहगीरों को भावुक कर दिया। हरिद्वार से पुरा महादेव (बागपत)की ओर जा रहा एक परिवार अपने वृद्ध माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर पैदल यात्रा कर रहा था।इस अनूठी सेवा भावना को देखकर लोग परिवार की तुलना श्रवण कुमार से करने लगे।

कांवड़ के दोनों सिरों पर वृद्ध माता और पिता विराजमान थे, जबकि उनके पुत्र, पुत्रवधुएं और अन्य परिजन बारी-बारी से कंधों पर कांवड़ उठाकर बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ आगे बढ़ रहे थे। मार्ग में जहां भी यह परिवार पहुंचा, श्रद्धालु उन्हें सम्मान और कौतूहल भरी नजरों से देखते रहे।

परिवार की पुत्रवधुओं ने बताया कि वर्षों से चल रहे एक न्यायालयी मुकदमे में उन्हें हाल ही में विजय मिली है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय भगवान शिव की कृपा और अपने माता-पिता के आशीर्वाद को देते हुए संकल्प लिया था कि पूरे परिवार के साथ अपने माता-पिता को हरिद्वार से पुरा महादेव तक सम्मानपूर्वक ले जाकर उनके हाथों भगवान शिव का जलाभिषेक कराएंगे। उन्होंने कहा कि सास-ससुर की सेवा करना हमारा सौभाग्य है। माता-पिता का आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी है।मुजफ्फरनगर जनपद के गांव माड़ी निवासी इस परिवार के प्रवेंद्र, सीमा, संदीप, रीतू, रवि, गीता सहित पोते-पोतियां वंश, अंकुश, गोलू, मुकुल, मिट्ठू, आरवी, निकिता, रिया, रोहन, अभिषेक और रौनक भी यात्रा में शामिल हैं। पूरा परिवार सेवा, समर्पण और पारिवारिक संस्कारों का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि बचपन से श्रवण कुमार की कथा सुनते आए हैं। उसी प्रेरणा से उन्होंने जीवन की इस खुशी को अपने माता-पिता के सम्मान और सेवा के माध्यम से मनाने का निर्णय लिया।

कांवड़ यात्रा के बीच सामने आया यह दृश्य लोगों के लिए केवल आस्था का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मातृ-पितृ भक्ति का जीवंत संदेश बन गया। जहां एक ओर समाज में वृद्धजनों की उपेक्षा की घटनाएं सामने आती रहती हैं, वहीं यह परिवार सेवा, सम्मान और संस्कार की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है।

anand prakash

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