12 वर्षों का सुधार, बारह वर्षों का बन गया विश्वासः राधा मोहन
मोतिहारी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के ऐतिहासिक 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को केसरिया विधानसभा के केसरिया स्थित बुद्धा होटल एंड कैफेटेरिया में आयोजित “विशेष जनसंपर्क अभियान बैठक” में पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री सह सांसद राधा मोहन सिंह विशेष रूप से सम्मिलित हुए।
श्री सिंह ने कहा कि भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना, यह केवल एक लक्ष्य नहीं, एक सपना है। 2014 में जब देश की दिशा बदली, तो सोंच भी बदली। राजनीति, राष्ट्रनीति बन गई। गरीब हो या अमीर, युवा हो या बुजुर्ग, महिला हो या पुरुष – सभी एक सपने से जुड़ गए। पीएम मोदी का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का आह्वान इतना चर्चित हुआ कि ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने इसे ‘वर्ड ऑफ द ईयर’ घोषित कर दिया। 2013 में भारत उन पांच देशों में था जिनकी अर्थव्यवस्था सबसे नाजुक थी। ‘फ्रैजाइल फाइव’ यानी कमजोर आर्थिक देशों के समूह का सदस्य माना जाने लगा था। किंतु दूरदृष्टि से लिए गए सुधारों ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया।
भारत आज तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। इस परिवर्तन के पीछे कई निर्णायक सुधार हैं। महंगाई नियंत्रण में आई। जीएसटी ने पूरे देश को एक बाजार में पिरो दिया। बैंकिंग सुधारों से एनपीए में कमी आई। जब सरकार की कमाई बढ़ी, तो वह पैसा तिजोरी में नहीं रुका, नागरिकों के पास लौटा। 2014 में 2 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं था। आज यह सीमा 12.75 लाख रुपया है। करोड़ों परिवारों की जेब में पैसा बचा है। टैक्स का बोझ घटा है और लोगों का भरोसा बढ़ा है।
राष्ट्र निर्माण में इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स को मजबूत करता है। साथ ही, सामाजिक समरसता को भी सुदृढू करता है। बीते 12 वर्ष में निर्मित पुल, सड़कें, नया संसद भवन, भारत मंडपम, यशोभूमि- ये केवल इमारतें नहीं, आत्मनिर्भर भारत की बुनियादी सोच के जीवंत दर्पण हैं। जल, थल और आकाश, तीनों में भारत स्पीड स्केल से आगे बढ़ रहा है। विज्ञान और तकनीक अब सिर्फ लैब तक सीमित नहीं। यह खेत तक पहुंची, अस्पताल तक पहुंची, घर-घर तक पहुंची।किसी भी नागरिक समाज और अर्थव्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विज्ञान और तकनीक सबसे महत्वपूर्ण है।
जबकि पूर्व में स्थिति यह थी कि यह बिखरी हुई थी। ऐसे में पीएम मोदी ने इसे शासन और विकास का प्रमुख उपकरण बनाया। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से सरलता आई। आज तकनीक ने पारदर्शिता बढ़ाई है। ईज ऑफ लिविंग यानी जीवन जीने की सुगमता को हर नागरिक का अधिकार बना दिया है। राष्ट्र निर्माण की बात हो और पूर्वोत्तर उपेक्षित रह जाए, यह नए भारत में संभव नहीं। आज ‘अष्टलक्ष्मी’ यानी पूर्वोत्तर के आठ राज्य विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। अब यह देश का आखिरी छोर नहीं, यह भारत की सुरक्षा व समृद्धि का प्रवेश द्वार है। 12 वर्षों का सुधार 12 वर्षों का विश्वास बन गया है। जीएसटी हो, फेसलेस टैक्स हो, डिजिटल इंडिया हो, सभी कदम ने नागरिक को एहसास दिलाया कि वह भी राष्ट्र निर्माता है।
पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर भारत बढ़ रहा है। यह केवल आंकड़ा नहीं, प्रत्येक भारतीय के सपने की उड़ान है। उक्त अवसर पर बिहार मछुआरा आयोग के अध्यक्ष ललन सहनी, जिलाध्यक्ष भाजपा पवन राज, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश सिंह , संयोजक केसरिया विधानसभा आनंद सिंह के अतिरिक्त बड़ी संख्या में अन्य लोग उपस्थित थे।

