रक्सौल का आश्रय स्थल बना महिलाओं के आत्मनिर्भरता का केंद्र, हुनर सीख आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं 

रक्सौल का आश्रय स्थल बना महिलाओं के आत्मनिर्भरता का केंद्र, हुनर सीख आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं 
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रक्सौल। सीमावर्ती शहर रक्सौल में संचालित स्वच्छ रक्सौल संस्था का आश्रय स्थल जरूरतमंद महिलाओं और युवतियों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। यहां आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय तथा प्रताड़ना का शिकार महिलाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नेपाल की रहने वाली विनिता भी उन्हीं महिलाओं में शामिल हैं, जो यहां सिलाई और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण ले रही हैं। उनका कहना है कि हुनर सीखने के बाद वह अपने परिवार की आर्थिक मदद कर सकेंगी। उनके जैसी 100 से अधिक महिलाएं अब तक इस केंद्र से जुड़ चुकी हैं।

संस्था के संचालक रंजीत सिंह ने बताया कि 6 दिसंबर 2025 को शुरू हुए इस केंद्र में पहले बैच में 52 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया था, जबकि वर्तमान में 45 महिलाओं और युवतियों का दूसरा बैच चल रहा है। यहां प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क है। साथ ही आश्रय लेने वाली महिलाओं के रहने और खाने की भी व्यवस्था की जाती है। संस्था की शाबरा खातून ने बताया कि कई महिलाएं ऐसी हैं, जिनका कोई सहारा नहीं है। ऐसे लोगों को प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने का भी प्रयास किया जाता है।

मानव तस्करी और घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सहारा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह केंद्र अब महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। प्रशिक्षण प्राप्त कर रही रतना देवी, शोभा शर्मा, जेबा खातून, रेखा कुमारी और अन्य महिलाओं ने बताया कि वे हुनर सीखकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती हैं।

anand prakash

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