सूर्य मंदिर तालाब से मिला 11 किलो का विशाल कछुआ, लोगों में कौतूहल

सूर्य मंदिर तालाब से मिला 11 किलो का विशाल कछुआ, लोगों में कौतूहल
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-धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी दे गया संदेश

रक्सौल। शहर के मुख्य पथ स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर परिसर के पवित्र तालाब से लगभग 11 किलो वजनी विशाल कछुए के मिलने से क्षेत्र में चर्चा एवं कौतूहल का माहौल बना हुआ है। मंदिर परिसर में पहुंचे श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों ने इसे धार्मिक आस्था, शुभ संकेत एवं प्राकृतिक संतुलन से जोड़कर देखा।

गौरतलब है कि सूर्य मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के निमित्त तालाब उड़ाही के दौरान  सूर्य मंदिर तालाब में अचानक विशालकाय कछुआ दिखाई देने के बाद लोगों की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने इसे भगवान विष्णु के कूर्म अवतार से जोड़ते हुए शुभ संकेत बताया। धार्मिक मान्यता है कि कछुआ धैर्य, समृद्धि, स्थिरता एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मंदिर परिसर अथवा पवित्र जलाशयों में कछुए की उपस्थिति को सनातन परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है।

मौके पर सूर्य मंदिर समिति के सचिव शम्भु प्रसाद चौरसिया, कोषाध्यक्ष गणेश अग्रवाल, राजू गुप्ता, गुड्डू खेतान एवं पप्पू गिरि का कहना है कि सूर्य मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में इतने बड़े कछुए का मिलना आश्चर्य एवं श्रद्धा दोनों का विषय है। इसे प्रकृति एवं धार्मिक चेतना के अद्भुत संगम के रूप में देखा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पर्यावरण प्रेमियों एवं जानकारों के अनुसार कछुआ जल स्रोतों के संरक्षण एवं जैविक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह जल को स्वच्छ रखने तथा जलीय पारिस्थितिकी को संतुलित बनाए रखने में सहायक होता है। तालाब में कछुए की मौजूदगी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि जलाशय का प्राकृतिक वातावरण अभी जीवित एवं सुरक्षित है। संरक्षण को लेकर समिति के सदस्यों ने लोगों से अपील की है कि मंदिर के तालाब में पूजा सामग्री या अन्य वस्तुएं न फेंकें। 

वहीं सामाजिक एवं पर्यावरण प्रेमियों ने लोगों से तालाब, नदियों एवं जलाशयों को प्रदूषण मुक्त रखने तथा जलीय जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील की है। उनका कहना है कि प्रकृति एवं जीव-जंतुओं की सुरक्षा ही आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण की सबसे बड़ी गारंटी है। मीडिया प्रभारी रजनीश प्रियदर्शी ने कहा कि सूर्य मंदिर तालाब में मिले विशाल कछुए ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जहां प्रकृति सुरक्षित रहती है, वहीं आस्था एवं जीवन का संतुलन भी कायम रहता है।

anand prakash

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