मोतिहारी में अवैध मनी लांड्रिंग गिरोह का खुलासा,70 लाख से अधिक भारतीय व नेपाली कैश बरामद

मोतिहारी में अवैध मनी लांड्रिंग गिरोह का खुलासा,70 लाख से अधिक भारतीय व नेपाली कैश बरामद
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-म्यूल अकांउट व क्रिप्टो करेंसी से कर रहे थे अवैध कारोबार-नेपाल सहित कई अन्य देशो से जुड़े तार

पूर्वी चंपारण। बिहार के पूर्वी चंपारण जिला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात के कुशल मार्गदर्शन में साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी गिरोह का खुलासा किया है।जिसके तार नेपाल सहित विश्व के अन्य देशो से क्रिप्टो एक्सचेंज से जुड़े हैं।

साइबर पुलिस उपाधीक्षक अभिनव पराशर के नेतृत्व में पुलिस ने कई घंटो तक छापेमारी करते हुए इनके पास से करीब 70 लाख रुपये से अधिक की भारतीय एवं नेपाली मुद्रा बरामद किया है।साथ ही करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य के यूएसडीटी (डिजिटल करेंसी) के लेन-देने करने का भी खुलासा किया है।

साइबर डीएसपी अभिनव पाराशर ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि पुलिस को भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी मात्रा में नकद और क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) के अवैध लेनदेन की सूचना मिली थी। इसके बाद सिकरहना एसडीपीओ उदय शंकर और साइबर डीएसपी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम ने घोड़ासहन और ढाका थाना क्षेत्र के कई ठिकानों पर छापेमारी की।

इस दौरान सुरेन्द्र प्रसाद (76 वर्ष), घोड़ासहन,विक्रम कुमार (21 वर्ष), जितना,प्रेमसागर कुमार (26 वर्ष), घोड़ासहन,गंगासागर कुमार (27 वर्ष), घोड़ासहन को हिरासत में लिया गया।जिनके पास से 56 लाख 71हजार 600 भारतीय रुपये व 13 लाख 67 हजार 810 नेपाली रुपये बरामद किये गये।

इसके साथ ही इनके पास से 11 वैसे मोबाइल बरामद किये गये जिनमें कई बैंकिंग ऐप्स और क्रिप्टो वॉलेट्स सक्रिय थे।वही इनके पास से 01 कैश काउंटिंग मशीन, 02 पॉस मशीन, 01 सीपीयू और टैब के साथ ही बड़ी संख्या में बैंक खाते और ई-केवाईसी से संबंधित दस्तावेज बरामद किये गये।

डीएसपी पराशर ने बताया कि जांच में यह सामने आया कि यह संगठित अपराधी गिरोह ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर खुले बैंक खाते) का इस्तेमाल कर करोड़ों की हेराफेरी कर रहा था। इन खातों के जरिए भारतीय मुद्रा को न केवल ठिकाने लगाया जा रहा था, बल्कि उसे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन के जरिए नेपाल के बैंक खातों में भी भेजा जा रहा था। उन्होने बताया कि गिरोह ने बाइनेंस जैसे क्रिप्टो एक्सचेंज का उपयोग कर लगभग 6 मिलियन USDT (जिसकी कीमत करीब 50 करोड़ रुपये है) का लेनदेन किया है।

डीएसपी पराशर ने बताया कि जांच में यह बात सामने आया कि इस गिरोह के सदस्यो ने इस काले धंधे को छुपाने के लिए बाजार में साधारण दुकानें खोल रखी थीं, लेकिन इनकी आड़ में ये ट्रेडिंग ऐप्स, क्रिप्टो एक्सचेंज और सीएसपी (CSP) के माध्यम से करोड़ों रुपये का हेर-फेर कर रहे थे। पूछताछ में मुख्य आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उनके कई बैंक खाते पहले से ही ‘फ्रीज’ हैं। जो उनकी संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि करते हैं।

फिलहाल पुलिस भारतीय और नेपाली मुद्रा के साथ-साथ डिजिटल करेंसी के इस काले कारोबार में शामिल अन्य लोगो की पहचान और इससे जुड़े खातों के सोर्स को खंगालने में जुटी है। छापेमारी दल में साइबर डीसपी अभिनव पराशर,सिकरहना डीएसपी उदय शंकर,इंस्पेक्टर मुमताज आलम, राजीव कुमार सिन्हा व घोड़ासहन और ढाका थाना के अन्य पुलिस पदाधिकारी और सशस्त्र बल शामिल थे।

anand prakash

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