बेतिया राज संपत्तियों पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला! 1986 कट-ऑफ लागू, 40 साल से कम कब्जे वाले भवन होंगे जब्त

बेतिया राज संपत्तियों पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला! 1986 कट-ऑफ लागू, 40 साल से कम कब्जे वाले भवन होंगे जब्त
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पटना। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐतिहासिक बेतिया राज की संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाली नियमावली, 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है।इसके तहत अब इन संपत्तियों को व्यवस्थित तरीके से सरकारी नियंत्रण में लाया जाएगा और जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य के भीतर और बाहर स्थित बेतिया राज की सभी चल-अचल संपत्तियों को विधिसम्मत प्रक्रिया के जरिए सरकार के अधीन लाया जाएगा, ताकि भू-माफियाओं के कब्जे से इन्हें मुक्त कर पारदर्शी प्रबंधन किया जा सके। यह नियमावली लागू होने के बाद बिहार में जमीन विवाद और अवैध कब्जे पर बड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

पारदर्शी प्रक्रिया और सख्त नियम

नई नियमावली अधिनियम 2024 के तहत तैयार की गई है। इसमें आपत्तियों के निपटान, कब्जा लेने, संपत्ति वर्गीकरण, अपील और पुनरीक्षण तक की पूरी प्रक्रिया तय की गई है। इससे जुड़े मामलों में कानूनी स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

60 दिन में आपत्ति, 90 दिन में निपटारा

अधिसूचना जारी होने के बाद संपत्तियों की सूची सार्वजनिक की जाएगी और संबंधित पक्षों को 60 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करने का मौका मिलेगा। जिला स्तर पर नामित अधिकारी, जिन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां होंगी, अधिकतम 90 दिनों में मामलों का निपटारा करेंगे।

समाहर्ता लेंगे कब्जा, होगा वर्गीकरण

यदि कोई आपत्ति नहीं आती या खारिज हो जाती है तो समाहर्ता संपत्तियों पर कब्जा लेंगे। इसके बाद संपत्तियों को चार श्रेणियों ऐतिहासिक/विरासत संपत्तियां, सरकारी कब्जे वाली, वैध पट्टाधारकों के कब्जे वाली व बिना दस्तावेज के कब्जे में बांटा जाएगा।

1986 कट-ऑफ: पुराने को राहत, नए पर सख्ती

सरकार ने 01 जनवरी 1986 को कट-ऑफ तिथि तय किया है। 40 साल से अधिक कब्जे वाले वैध अधिभोगियों को राहत देते हुए स्वामित्व का अवसर मिलेगा। 1986 के बाद कब्जा करने वालों के भवन जब्त (कंफिस्केट) किए जाएंगे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। बिना दस्तावेज वाले मामलों में बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत बेदखली की जाएगी।

विरासत संपत्तियों का संरक्षण

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की संपत्तियों का संरक्षण प्राथमिकता होगी। इसके लिए विशेषज्ञों और पुरातात्विक संस्थानों की मदद ली जाएगी।

जनहित में होगा उपयोग

सरकार का दावा है कि इस नियमावली से पारदर्शिता बढ़ेगी, भू-माफियाओं पर लगाम लगेगी और राज्य की बहुमूल्य संपत्तियों का उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकेगा।

जिलावार बेतिया राज की जमीन (एकड़ में)

– पश्चिम चम्पारण : 16671.91

– पूर्वी चम्पारण : 7640.91

– सारण : 109.96

– सिवान : 7.29

– गोपालगंज : 35.58

– पटना : 11.49

कुल भूमि: 24,477.14 एकड़

anand prakash

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