कोटवा गांव में गोलीबारी और आत्महत्या मामले में नहीं हुआ एफआईआर

कोटवा गांव में गोलीबारी और आत्महत्या मामले में नहीं हुआ एफआईआर
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कोटवा। कोटवा गांव में फिरोज अंसारी की मौत और उसके भाई कासिम मिया के गोली लगने से घायल होने के मामले में मंगलवार शाम तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। बताया गया है कि घटना के तकरीबन 36 घंटे बीतने के बावजूद परिजनों द्वारा कोई आवेदन पुलिस को नहीं दी गई है। थानाध्यक्ष करन सिंह ने बताया है कि आवेदन नहीं मिलने की स्थिति में चौकीदार के बयान पर एफआईआर दर्ज किया जायेगा।

बता दे कि सोमवार की सुबह कोटवा गांव में किस्मत मियां का बेटा फिरोज अंसारी का शव घर में फंदे से लटकता मिला। वही उसके सर में गोली लगने की स्थिति भी देखी गई।  किस्मत मियां के छोटे बेटे कासिम मियां को घर में ही गोली मार दी गई , जिससे वह जख्मी हो गया और अस्पताल में इलाजरत है। बहरहाल पुलिस घर से बरामद किए गए आर्म्स, गोली और मोबाईल फोन की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक फिरोज का शव घर में नायलॉन की रस्सी से लटक रहा था, नीचे एक ट्रंक था। वही कमरे में अंदर से ताला लगा था।

गन शॉट और हैंगिंग को लेकर पोस्टमार्टम मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच में

कोटवा। थाना क्षेत्र अंतर्गत कोटवा गांव में संदिग्ध स्थिति में फिरोज अंसारी की मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच कराने के लिए सदर अस्पताल से रेफर किया गया। इसको लेकर पोस्टमार्टम में विलंब हुआ। दरअसल गले में फंदा और सर में गोली लगना, दोनों ही स्थिति होने की वजह से शव का पोस्टमार्टम सदर अस्पताल मोतिहारी में संभव नहीं हुआ और शव को मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच भेजा गया।

बताया गया है कि इस तरह के संदिग्ध परिस्थिति में मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में बड़े अस्पताल में ही संभव हो पाता है । जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम आधुनिक तकनीक के द्वारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को संपादित करते है।

anand prakash

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