खाली खाए खातिर केतना पापड़ बेले के पड़ल, कवि बादशाह प्रेमी के भोजपुरिया रंग में सराबोर हुए श्रोता
– चंपारण सत्याग्रह महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में कई नामचीन कवियों के कविता, गीत और गजल पर झूमे लोग
पूर्वी चंपारण। जिले के कोटवा प्रखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव जसौली पट्टी में देर रात चंपारण सत्याग्रह महोत्सव के दूसरे दिन हास्य, व्यंग, देश भक्ति सहित गीत संगीत की महफिल सजी। इस दौरान कई नामचीन कवियों ने लोगो को खूब गुदगुदाया। …यह पूज्य बापू की कर्मभूमि, यह सत्याग्रह की जन्मभूमि… ऐसी कविताओं से लोगों में देश भक्ति का जुनून भरने वाले दिल्ली से आए युवा कवि अनुपम प्रियदर्शी सीधे श्रोताओं के मन मिजाज में उतर गए। उतर प्रदेश के मुगलसराय की सरजमी से पहुंचे सुहैल उस्मानी की गजलों न तुम जीते न हम जीते, न तुम हारे न हम हारे…,तू अपनी आन खायेगा, तू अपनी शान खायेगा…, कभी तू मुसकिराएगा कभी जी भर कर रोएगा ….।
मोहब्बत और सियासत का गजब का खेल है प्यारे जो तुझको साथ रखता है वही तुझको डुबोएगा…, की प्रस्तुति पर लोगों का खूब दाद मिला। ,जानते सब है आग बरसेगी, फिर भी कागज के घर बनाते है, पर लोगों की तालिया बजती रही। महिला कवित्री गूंजा गुंजन के रामनवमी के अवसर पर गाए गीत, मुझसे किसी ने पूछा किसके हिस्से कितने राम, मैने कहा जो जितना माने उसके हिस्से उतने राम, की प्रस्तुति ने लोगो में भक्ति के भाव भर दिए। कुदरत की अनमोल बेटियां…, काव्य पाठ से लोग भावुक हो गए।
भोजपुरी के मानद व्यंग्यकार यूपी के देवरिया निवासी बादशाह प्रेमी ने कहा कि चम्पारण ने मुझे नाम दिया और मैं बादशाह तिवारी से बादशाह प्रेमी बन गया। सोशल मीडिया पर उनके 7 हजार से अधिक वीडियो उपलब्ध हैं। उनका मोबाइल फोन पर कहा गया व्यंग आज की सच्चाई को बयां कर रहा था। ,कितनों केहू खास रहे, बेपर्चित के हाथों कहियो कुछ खईह मत…, उनकी बहुचर्चित कविता ,कुकुर भोज, खाली खाएला केतना पापड़ बेले के पडल…., लोगो को खूब ठहाके लगवाए। सिवान के तंग इनायतपुरी, बेतिया के अरुण गोपाल, मोतिहारी के गुलरेज शहजाद और शुभांगी भारती की रचनाओं ने भी अदभूत समा बांधा और लोगो को आनंदित कर दिया। कार्यक्रम का संचालन युवा समाजसेवी आदित्य मानस ने किया।

