साल 2005 से पहले बिहार का हाल खराब था, अब राज्य में विकास और शांति का माहौल : नीतीश कुमार

साल 2005 से पहले बिहार का हाल खराब था, अब राज्य में विकास और शांति का माहौल : नीतीश कुमार
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बेगूसराय। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वर्ष 2005 से पहले बिहार की स्थिति बेहद खराब थी। लोग शाम के बाद घर से बाहर निकलने से डरते थे, सड़कें जर्जर थीं और बिजली की आपूर्ति भी लगभग नहीं के बराबर थी।अब राज्य में विकास के साथ-साथ शांति और भाईचारे का माहौल है।

समृद्धि यात्रा के क्रम में शनिवार को बेगूसराय जिले के बियाडा प्रांगण में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार शुरू से ही बिहार के विकास के लिए निरंतर काम कर रही है। आज राज्य में डर और भय का माहौल समाप्त हो चुका है और लोगों के बीच प्रेम, भाईचारा और शांति का वातावरण है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2023 से बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से 2 लाख 58 हजार सरकारी शिक्षकों की बहाली की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 से पहले 3 लाख 68 हजार नियोजित शिक्षक बने थे, जिनमें से 28 हजार 976 शिक्षक बीपीएससी के माध्यम से सरकारी शिक्षक बन चुके हैं। नियोजित शिक्षकों को बीपीएससी की परीक्षा देने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें एक साधारण परीक्षा के माध्यम से सरकारी शिक्षक बनाया जाएगा। इसके लिए पांच अवसर देने का निर्णय लिया गया है, जिनमें अब तक चार परीक्षाएं आयोजित हो चुकी हैं और 2 लाख 66 हजार नियोजित शिक्षक पास हो चुके हैं। अब केवल 73 हजार शिक्षक शेष हैं, जिन्हें एक और अवसर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद राज्य में सरकारी शिक्षकों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 5 लाख 24 हजार हो गई है। इसके अलावा बीपीएससी के माध्यम से 45 हजार नए पदों पर शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था काफी खराब थी। वर्ष 2006 से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा और इलाज की व्यवस्था की गई है। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हर महीने औसतन 11 हजार 600 मरीज इलाज के लिए आते हैं। पहले बिहार में केवल छह मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 12 हो गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में शुरू की गई ‘सात निश्चय’ योजना के तहत युवाओं को आर्थिक सहायता, महिलाओं को आरक्षित रोजगार, हर घर तक बिजली, हर घर नल का जल, शौचालय निर्माण, टोलों को पक्की सड़कों से जोड़ने और शिक्षा के अवसर बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में जाति आधारित गणना कराई गई, जिसमें लोगों की आर्थिक स्थिति का भी आकलन किया गया। इस सर्वे में लगभग 94 लाख गरीब परिवारों की पहचान हुई है, जिनमें अपर कास्ट (अपर कास्ट), पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित, महादलित और मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। इन सभी परिवारों को रोजगार के लिए दो लाख रुपये की सहायता देने की योजना बनाई गई है। अब तक 83 लाख 20 हजार परिवारों को इस योजना से जोड़कर राशि देना शुरू कर दिया गया है, जबकि शेष परिवारों को अगले महीने तक सहायता राशि दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से पुलिस में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जिसके कारण बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या देश में सबसे अधिक हो गई है। इसके अलावा वर्ष 2016 से सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बेगूसराय जिले में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पटना से बेगूसराय तक बेहतर सड़क का निर्माण कराया गया है, जिससे आवागमन सुगम हुआ है। इसके अलावा जिले में कई पुल और सड़कों का निर्माण किया गया है। गंगा नदी पर राजेंद्र सेतु के समानांतर सिक्स लेन पुल, बेगूसराय से मुंगेर के बीच रेल सह सड़क पुल तथा बरौनी-खगड़िया फोर लेन सड़क का निर्माण कराया गया है।

उन्होंने कहा कि सिमरिया में गंगा तट पर घाट का निर्माण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं का भी विकास किया गया है। साथ ही बेगूसराय में इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक संस्थान, महिला आईटीआई तथा सभी अनुमंडलों में आईटीआई की स्थापना की गई है। इसके अलावा जीएनएम और पारा मेडिकल संस्थान भी स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 के दिसंबर और 2025 के जनवरी-फरवरी में उन्होंने ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान सभी जिलों का दौरा कर विकास कार्यों की समीक्षा भी की है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले मुख्यमंत्री ने जिले में 274 करोड़ रुपये की लागत से 400 विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसमें 165 करोड़ रुपये की लागत से 211 योजनाओं का उद्घाटन तथा 109 करोड़ रुपये की लागत से 189 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने बेगूसराय औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों का अवलोकन भी किया। उन्होंने बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेडिवर्सल सिमरन मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और ऋषभराज (कूलप्लस प्लाटोवेयर) का शिलापट्ट अनावरण कर उद्घाटन किया, जबकि एपिक एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का शिलान्यास किया। इसके अलावा इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर, बेगूसराय में स्थापित नेचर पॉलीप्लास्ट लिमिटेड का फीता काटकर उद्घाटन किया और वहां हो रहे उत्पादन कार्यों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान उन्होंने 9715 जीविका स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से ऋण के तहत 578 करोड़ 9 लाख रुपये का सांकेतिक चेक प्रदान किया। इसके साथ ही जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति का निबंधन प्रमाण पत्र, 13 दीदी अधिकार केंद्र की चाभी, सतत जीविकोपार्जन योजना के लाभार्थियों को ई-रिक्शा की चाभी तथा 405 लाभार्थियों को जीविकोपार्जन निवेश निधि के तहत दो करोड़ रुपये का सांकेतिक चेक भी दिया गया। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड ऋण से संबंधित लाभ भी वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री ने प्रगति यात्रा में घोषित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की और अधिकारियों से उनके क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी ली। इन योजनाओं में तेघड़ा-मुबारकपुर पथ का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण, बखरी-बहादुरपुर (खगड़िया बॉर्डर) बाईपास पथ का निर्माण, बीटीपीएस चकिया (एनएच-31) से लखमिनियां बलिया भाया गुप्ता लखमिनियां बांध तक बेगूसराय बाईपास पथ का चौड़ीकरण, कावर झील से जुड़े नालों की उड़ाही और चेकडैम निर्माण, सिमरिया घाट एवं कल्पवास मेला क्षेत्र का विकास तथा शाम्हो प्रखंड के अकहा पूरहा में डिग्री कॉलेज की स्थापना जैसी योजनाएं शामिल हैं।

इस अवसर पर राज्य के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता, गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार, विधायक अभिषेक आनंद, रजनीश कुमार सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

anand prakash

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