अलविदा की नमाज़ में  विश्व की शान्ति के लिए मांगी गई दुआएं 

अलविदा की नमाज़ में  विश्व की शान्ति के लिए मांगी गई दुआएं 
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केसरिया। रमजानुल मुबारक का पवित्र महीना हमारे लिए रहमत व बरकत लेकर आता है। ये महीना ख़ास इबादतों का होता है। इस महीने का रोज़ा हर समझदार, सेहत मंद मर्द व औरत पर फर्ज़ (अनिवार्य) है। इफ्तार व सेहरी के समय खुदा की ख़ास रहमत पाने का अवसर होता है। रमज़ान के महीने में कुरआन शरीफ़ को हज़रत मुहम्मद अलैहिस्सलाम पर उतारा गया।

भोर के समय से सूर्यास्त तक ख़ुद को केवल खाने पीने से ही रुकने का नाम नहीं है बल्की खाने पीने समेत ख़ुद को सभी गुनाहों से बचाने का नाम रोज़ा है। उक्त बातें जुम्मा के अवसर पर केसरिया जामा मस्जिद में खिताब करते हुए मौलाना अनीसुर रहमान चिश्ती ने कहीं और आगे बताया कि इस महिने में अल्लाह की ख़ास रहमत नज़िल होती है।

इस महीने में मस्जिदों की रौनक बढ़ जाती है। इशा की नमाज के बाद मस्जिदों में 20 रकात ‘तरावीह’  की नमाज़ जमाअत के साथ अदा की जाती है, जिस में मुकम्मल कुरआन की तिलावत होती है। इफ्तार के समय सभी रोजेदार एक साथ बैठ कर रोजा खोलते हैं।  इस समय की दुआ कबूल होती है। मौलाना सेराजुल हक अशरफी लाला छपरा, ने कहा कि रमज़ान उल मुबारक का पवित्र महीना हमारे दिल व दिमाग को पाक व साफ करने के लिए आता है। ये महीना सब्र व शुक्र का तरीक़ा सिखाता है। ग़रीब, बे सहारा, असहाय लोगों की मदद करने का पैगाम देता है। इस अवसर पर देश में अमन चैन, उन्नति, तरक्की की दुआ मांगी गई।

anand prakash

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