मप्र के इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक शुरू

मप्र के इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक शुरू
Facebook WhatsApp

-कृषि, खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि विकास के लिए साझा वैश्विक सहयोग पर हुई सार्थक चर्चा

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 के अंतर्गत तीन दिन तक ब्रिक्श देशों के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद आज शुक्रवार से कृषि कार्य समूह के महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तहत ब्रिक्श देशों के कृषि मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक शुरु हुई।केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कृषि, खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि विकास के लिए साझा वैश्विक सहयोग पर सार्थक चर्चा हुई।

बैठक में केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वसुधैव कुटुंबकम के मंत्र के साथ वैश्विक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने बैठक में छोटे एवं सीमांत किसानों के सशक्तीकरण, प्राकृतिक खेती तथा कृषि क्षेत्र की साझा चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोग और समन्वय पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ दुनिया को एक परिवार मानता है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शांति, समन्वय और साझेदारी आधारित विकास के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा करते हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों को मिलकर इनके समाधान तलाशने होंगे।

उन्होंने कहा कि यदि छोटे किसान मजबूत होंगे तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र में औसतन 4.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। देश का खाद्यान्न उत्पादन करीब 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। गेहूं उत्पादन 118 मिलियन टन और बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। वहीं मछली उत्पादन भी 19 मिलियन टन से ज्यादा हो गया है। उन्होंने कहा कि देश के करीब 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाओं से किसानों को आर्थिक सुरक्षा और सहायता मिल रही है।

उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने “खेत बचाओ अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और नई तकनीकें पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में नेतृत्व कर रही हैं। वहीं “ड्रोन दीदी” जैसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी बदलाव का उदाहरण हैं। उन्होंने युवाओं से कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप, नवाचार और डिजिटल तकनीकों के जरिए आगे आने का आह्वान किया।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने इंदौर में हो रही ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक से पहले पौधरोपण किया। उन्होंने कहा कि भारत की सदियों पुरानी परंपरा सिखाती है कि सुखी जीवन का रास्ता समृद्ध खेतों और सुरक्षित पर्यावरण से होकर ही गुजरता है। जब तक हमारी मिट्टी और पर्यावरण सुरक्षित है, तब तक हमारा भविष्य सुरक्षित है। आइए, आधुनिक कृषि के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन को भी मजबूत बनाएं। प्रतिदिन एक पौधा अवश्य लगाएँ।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page