चरस तस्करी मामले में एक को दस वर्षों का सश्रम कारावास

चरस तस्करी मामले में एक को दस वर्षों का सश्रम कारावास
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मोतिहारी। एनडीपीएस कोर्ट प्रथम के विशेष न्यायाधीश रेशमा वर्मा ने चरस तस्करी मामले में दोषी पाते हुए नामजद एक अभियुक्त को दस वर्षों का सश्रम कारावास एवं एक लाख रुपए अर्थ दंड की सजा सुनाए है। अर्थ दंड नहीं देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

सजा रक्सौल गांधीनगर वार्ड नं 9 निवासी हकीक खान के पुत्र दिलशाद खान को हुई। मामले में 17 वीं वाहिनी के प्रभारी रामप्रसाद मीणा ने रक्सौल (हरैया ओपी) थाना कांड संख्या 365/2023 दर्ज कराया था। जिसमें कहा था कि 2 अगस्त 2023 को गुप्त सूचना मिली कि नेपाल सेभारत में कुछ मादक पदार्थ का खेप आने वाला है। सूचना के आलोक में करीब 13.45 बजे बटालियन ने अपनी जाल बिछा दी। उसी दौरान भारतीय सीमा स्तम्भ संख्या 3990/33 के पास से एक युवक काले रंग का बैग लेकर पैदल ही आ रहा था। वह बटालियन मेंस को देखकर भागने लगा। शक होने पर जवानों ने थोड़ी दूर पर ही उसे धर दबोचा। जांच के दौरान उसके बैग से चार पॉकेट में दो किलोग्राम चरस बरामद हुआ।

एनडीपीएस वाद संख्या 72/2023 विचारण के दौरान विशेष लोक अभियोजक डॉ. शंभू शरण सिंह छह गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर गवाही कराई। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के दलीलें सुनने के बाद धारा 20(बी)ii (सी) एनडीपीएस एक्ट में दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाए। सजा की अवधि का समायोजन कारागार में बिताए अवधि में समायोजित होगी।

anand prakash

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