बेतिया राज के जमीन को लेकर निकला किसान अधिकार मार्च,सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानो का प्रदर्शन
पूर्वी चम्पारण। चंपारण की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर किसान आंदोलन की साक्षी बनी। चम्पारण किसान मजदूर संघर्ष समिति के आह्वान पर बेतिया राज की जमीन से जुड़े कानून के विरोध में बड़ी संख्या में किसानों और मजदूरों ने ‘किसान अधिकार मार्च’ निकालकर बिहार सरकार की कथित नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कोठियों से संबंधित वह जमीन, जिसे वर्ष 1860 में बेतिया राज से लगभग 84 लाख रुपये में इंडिगो कंपनी ने खरीदा था, आज भी विवादों में घिरी हुई है। किसानों का आरोप है कि राज्य सरकार की वर्तमान नीतियां स्थानीय किसानों के हितों के विरुद्ध हैं और वर्षों से खेती कर रहे गरीब व भूमिहीन किसानों को बेदखल करने की साजिश की जा रही है।सैकड़ों किसानों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर मोतिहारी के नरसिंह बाबा मंदिर प्रांगण से कचहरी चौक तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला। बाद में यह मार्च कचहरी चौक पर धरना-प्रदर्शन में बदल गया।

धरना दे रहे किसान मजदूर संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। संघर्ष समिति से जुड़े किसान नेता सुभाष सिंह कुशवाहा ने आरोप लगाया कि सरकार के गलत कानूनों के कारण भूमिहीन मजदूरों का आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
किसानों ने कहा कि चम्पारण की धरती पहले भी नील की खेती और जमींदारी शोषण के खिलाफ आंदोलनों की गवाह रही है, और आज नई नीतियों के रूप में वही संघर्ष फिर सामने आ रहा है।

