बिहार में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ, 30 जून तक किसानों को किया जाएगा जागरूक

बिहार में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ, 30 जून तक किसानों को किया जाएगा जागरूक
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पटना। बिहार में रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को राज्यव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई।कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मीठापुर स्थित कृषि भवन से सैकड़ों किसानों की उपस्थिति में अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान 30 जून तक चलाया जाएगा।

इस अवसर पर कृषि मंत्री ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल मिट्टी को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की समृद्धि से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है और पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से धरती की उर्वर शक्ति को होने वाले नुकसान को रोकना है। प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल मिट्टी की सेहत सुधारी जा सकती है, बल्कि परिवारों को भी स्वस्थ जीवन मिल सकता है। उन्होंने किसानों से गोबर, गोमूत्र और बीजामृत जैसे प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।

कृषि मंत्री ने कहा कि मिट्टी जांच रिपोर्टों से स्पष्ट हो रहा है कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग के कारण मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। इससे उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में ‘खेत बचाओ अभियान’ समय की आवश्यकता बन गया है।

उन्होंने कहा कि अभियान का मूल मंत्र ‘सही खाद और सही सलाह’ है। किसानों को अपने खेतों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाना चाहिए और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि केंद्र सरकार की नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के तहत बिहार के सभी 38 जिलों में क्लस्टर आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए 800 कृषि सखियों (जीविका दीदियों) का चयन किया गया है, जिन्हें किसानों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन कृषि सखियों को प्रतिमाह 5,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में 114 नए क्लस्टरों का गठन किया जाएगा और 5,700 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 4,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही जैव उत्पादन संसाधन केंद्र स्थापित करने के लिए एक लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रमाणन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। भारत सरकार द्वारा अधिकृत क्षेत्रीय परिषदों के माध्यम से प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण पर प्रति हेक्टेयर 2,100 रुपये का भुगतान किया जाएगा।

उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, मृदा परीक्षण और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे खेती अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बन सकेगी।

anand prakash

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