सौतेले भाइयों की हत्या में छह को आजीवन कारावास, 25-25 हजार जुर्माना

सौतेले भाइयों की हत्या में छह को आजीवन कारावास, 25-25 हजार जुर्माना
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पूर्वी चंपारण।संपत्ति विवाद में दो सौतेले भाइयों की निर्मम हत्या के चर्चित मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राघवेंद्र नारायण सिंह ने मुख्य आरोपी सौतेले भाई समेत कुल छह नामजद अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि जुर्माना न देने पर दोषियों को एक साल अतिरिक्त सजा काटनी होगी। वसूल की गई अर्थदंड की राशि मृतक भाइयों की मां और सूचिका गोदावरी देवी को दी जाएगी।

न्यायाधीश ने गोदावरी देवी को पीड़ित घोषित करते हुए बिहार पीड़ित प्रतिकर क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश की प्रति भेजने का निर्देश भी दिया है। सजा पाने वालों में घोड़ासहन थाना के जगीराहां कोठी निवासी स्व. बासुदेव राय के पुत्र जयसी लाल राय, शिवमंगल राय के पुत्र विजय राय, स्व. रामवरण राय के पुत्र शिवपूजन राय व लालबाबू राय, स्व. सूरज राय के पुत्र शिवपूजन राय और आदापुर थाना के कचूरबारी निवासी रामचंद्र प्रसाद के पुत्र गोपाल प्रसाद शामिल हैं।

मामला 4 जुलाई 2017 की रात का है। घोड़ासहन थाना के जगीराहां निवासी स्व. बासदेव राय की विधवा गोदावरी देवी ने घोड़ासहन थाना कांड संख्या 355/2017 दर्ज कराया था। प्राथमिकी में बताया कि वे अपने पति की दूसरी पत्नी थीं। पहली पत्नी से सौतेला पुत्र जयसी राय था। जयसी अपने सौतेले भाइयों रोश कुमार और सोनू कुमार से द्वेष रखता था। घटना की रात करीब 8:30 बजे रोश और सोनू दुकान बंद कर बाइक से घर लौट रहे थे। बथान के पास पहुंचते ही नामजद लोगों ने दोनों की आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर बाइक रोक दी। इसके बाद माथे में गोली मारकर और धारदार हथियार से हमला कर दोनों की मौके पर ही हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि चल-अचल संपत्ति के विवाद में हत्या की गई थी

सत्रवाद संख्या 1173/2017 की सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक ईश्वरचंद्र दूबे ने सात गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने 29 मई को ही सभी को दोषी ठहराकर जेल भेज दिया था। सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद धारा 302, 147, 148 भादवि के तहत सभी छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

anand prakash

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