दुष्कर्म कराने मामले में नामजद महिला अभियुक्त को दस वर्ष की सश्रम कारावास 

दुष्कर्म कराने मामले में नामजद महिला अभियुक्त को दस वर्ष की सश्रम कारावास 
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मोतिहारी। अनन्य रेप एवं पॉक्सो अधिनियम कोर्ट नंबर 3 के विशेष न्यायाधीश मिथलेश कुमार झा ने दुष्कर्म कराने के मामले में नामजद महिला अभियुक्त को दोषी पाते हुए दस वर्षों का सश्रम कारावास एवं बीस हजार रुपए अर्थ दंड की सजा सुनाए। अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

वहीं अर्थदंड वसूल पाए जाने पर पीड़िता को देय होगी। सजा शहर के अगरवा निवासी स्व.अजय पासवान की पत्नी रीता देवी को हुई। मामले में पीड़िता के पिता ने अज्ञात के विरुद्ध अपनी पुत्री के लापता होने की प्राथमिकी बंजरिया थाना कांड संख्या 659/2023 दर्ज कराया था। जिसमें कहा था कि 1 जून 2023 की संध्या मजदूरी कर घर आया तो उसकी पुत्री घर से लापता थी। काफी खोजबीन के बाद उसकी कहीं सुराग नहीं मिली।

कई माह के बाद पुलिस ने सूचना के आलोक में सदर अस्पताल से पीड़िता को बरामद किया। साथ ही मामले की परत खुलती चली गई। पीड़िता ने अपने बयान में बताई की वह घर से सेमरा अपने दोस्त चांदनी कुमारी के घर आई। जहां कुछ दिन रहने के बाद उसके दोस्त ने उसे रीता देवी नामक महिला के पास अगरवा रहने को लेकर कह कर चली गई। उक्त महिला रुपए लेकर मुझसे जबरन दुष्कर्म कराने लगी। इसी बीच वह गर्भवती हो गई। रीता देवी उसकी गर्भ गिराने के लिए उसे सदर अस्पताल लाई थी।

जहां पीड़िता को उसके गांव के किसी व्यक्ति ने देख लिया और मेरे पिता को सूचित कर दिया। जिसके आलोक में पुलिस ने मुझे हिरासत में लेकर थाना लाई। पॉक्सो वाद संख्या 121/2023 विचारण के दौरान अनन्य विशेष लोक अभियोजक पुष्पा दुबे ने आठ गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर अभियोजन पक्ष रखा। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के दलीलें सुनने के बाद धारा 366ए,372 भादवि में दोषी पाते हुए नामजद महिला अभियुक्त को उक्त सजा सुनाए। कारागार में बिताए अवधि का समायोजन सजा की अवधि में होगी।

anand prakash

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