एमजीसीयू के मीडिया स्टडी विभाग में एंकरिंग व पॉडकास्ट पर विशेष वर्कशॉप

एमजीसीयू के मीडिया स्टडी विभाग में एंकरिंग व पॉडकास्ट पर विशेष वर्कशॉप
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पूर्वी चंपारण। महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग ने बीएजेएमसी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए एंकरिंग और संचार कौशल विषयक कार्यशाला का आयोजन ब्लेंडेड मोड में किया। कार्यशाला की मुख्य वक्ता रंजना रावत थी, जो वर्तमान में दिल्ली की प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल में एंकर के रूप में कार्यरत हैं।

स्वागत वक्तव्य में विभागाध्यक्ष डॉ. अंजनी कुमार झा ने कहा कि मीडिया के विद्यार्थियों के लिए संचार कौशल, पॉडकास्ट और एंकरिंग की बेहतर समझ होनी चाहिए। बदलते तकनीकी युग में अपने को अपडेट करना और संचार कौशल की बारीकियों की समझ रखना उन्हें अन्य से अलग बनाएगा। मुख्य वक्ता रंजना रावत ने आत्मविश्वास, एंकरिंग व पॉडकास्टिंग से जुड़ी बारीकियों और मीडिया इंडस्ट्री की व्यावहारिक समझ और प्रोफेशनल एंकरिंग के बारें में जानकारी दी।

उन्होंने पॉडकास्टिंग के मूल मंत्र साझा किए। उन्होंने कहा कि एक सफल एंकर बनने के लिए कॉन्फिडेंस, नॉलेज और कम्युनिकेशन स्किल्स सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। छात्रों को समझाया कि कैमरे के सामने बोलना सिर्फ पढ़ना नहीं होता, बल्कि अपनी बात को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाना असली कला है। साथ ही उन्होंने बताया कि टेलीप्रॉन्पीटर का सही तरीके से कैसे प्रयोग करे। कार्यशाला के दौरान छात्रों द्वारा पूछे गए कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब भी दिए गए। छात्रों ने जानना चाहा कि एंकरिंग के दौरान स्पीड और एक्सप्रेशन को कैसे मैनेज करें?, लाइव शो में नर्वसनेस को कैसे दूर करें? और मंच पर आत्मविश्वास कैसे बनाए रखें? इन सभी विषयों पर रंजना रावत ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए समाधान बताए। इसके साथ ही उन्होंने वोकल एक्सरसाइज भी करवाई, जिससे आवाज़ में स्पष्टता, ठहराव और प्रभाव बढ़ाया जा सके।

उन्होंने कहा कि एंकर की आवाज़ उसकी सबसे बड़ी पहचान होती है, इसलिए वॉइस मॉड्यूलेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए और हर दिन समाचारपत्र जरूर पढ़ना चाहिए। कार्यशाला का संयोजन अतिथि प्राध्यापक डॉ. मयंक भारद्वाज थे।

कार्यशाला आयोजन में विभाग के शिक्षक डॉ. साकेत रमण, डॉ. सुनील दीपक घोड़के, डॉ. उमा यादव की महत्वपूर्ण भूमिका थी। विद्यार्थियों ने कार्यशाला में बढ़-चढ़कर सहभागिता की।

anand prakash

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