यूजीसी के नए प्रावधानों पर एमएलसी सच्चिदानंद राय ने पीएम और राष्ट्रपति को लिखा पत्र
पटना। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए कानूनों और प्रस्तावित संशोधनों को लेकर देशभर में छिड़ी बहस अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गई है। इस विषय पर सारण निकाय क्षेत्र के बिहार विधान परिषद सदस्य ई. सच्चिदानंद राय ने प्रधानमंत्री और महामहिम राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इन संशोधनों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में एमएलसी सच्चिदानंद राय ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थान समाज की एक अत्यंत पवित्र और संवेदनशील इकाई हैं। उन्होंने लिखा कि ये संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला हैं। विश्वविद्यालय वह पावन स्थान है जहाँ युवा जाति, वर्ग और संकीर्ण भेदभाव से ऊपर उठकर ज्ञान अर्जित करते हैं। यहाँ विकसित होने वाली मित्रता, सहयोग और टीमवर्क ही उनके व्यक्तित्व और देश के भविष्य का निर्माण करती है।
एमएलसी ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि शिक्षा का मूल उद्देश्य समानता, समरसता और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना है। उन्होंने आशंका जताई कि प्रस्तावित नए यूजीसी कानूनों के कुछ प्रावधानों से शिक्षा व्यवस्था में पुनः जातिगत विभाजन और असमानता को बढ़ावा मिल सकता है। एमएलसी सच्चिदानंद राय ने पत्र में कहा है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में विभाजनकारी प्रवृत्तियां मजबूत होती हैं तो इसका सीधा नकारात्मक असर शैक्षणिक वातावरण छात्रों के मनोबल और राष्ट्र की सामाजिक अखंडता पर पड़ेगा। सच्चिदानंद राय ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से विनम्र अनुरोध किया है कि शिक्षा को अवसर की समानता का सबसे बड़ा माध्यम माना जाए। उन्होंने मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था को हर प्रकार के भेदभाव से मुक्त और समावेशी बनाए रखना अनिवार्य है, ताकि विद्यार्थी किसी भी मानसिक दबाव के बिना शिक्षा ग्रहण कर सकें।
पत्र के अंत में एमएलसी ने करबद्ध प्रार्थना करते हुए सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा की जाए। उन्होंने जोर दिया कि यूजीसी के नियम ऐसे होने चाहिए जो शिक्षा के मूल उद्देश्यों समानता और छात्रहित की रक्षा करें, न कि समाज में किसी प्रकार की दरार पैदा करें।

