जागृति योजना अंतर्गत सर्वाइवर केयर एवं ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड अप्रोच पर संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन
-पीड़ितों के प्रति संवेदनशील, मानवीय एवं उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार अपनाएंः जिला जज
मोतिहारी। पूर्वी चंपारण। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पूर्वी चंपारण, के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सभाकक्ष में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की जागृति योजना के अंतर्गत पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स, पॉक्सो मामलों के विशेष लोक अभियोजकों तथा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के पुलिस पदाधिकारियों के लिए एक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जिसका मुख्य विषय “यौन मानव तस्करी से मुकाबला करने में सर्वाइवर की देखभाल एवं आघात-संवेदनशील दृष्टिकोण” था। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष-सह-प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अभिषेक कुमार दास ने किया। उन्होंने यौन मानव तस्करी के पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने गोल्डन ऑवर के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संकट की स्थिति में प्रारंभिक समय के दौरान की गई त्वरित एवं उचित कार्रवाई पीड़ित के संरक्षण, पुनर्वास और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से पीड़ितों के प्रति संवेदनशील, मानवीय एवं उत्तर दायित्वपूर्ण व्यवहार अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, के सचिव नितिन त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स, विशेष लोक अभियोजकों एवं पुलिस पदाधिकारियों को विषय की गहन जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता को भी बढ़ाती हैं।
एक प्रशिक्षित एवं जागरूक विधिक सहायता तंत्र ही पीड़ितों को समय पर उचित कानूनी सहायता, संरक्षण और न्याय उपलब्ध कराने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। पूर्वी चंपारण का सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण मानव तस्करी की चुनौती से निपटने के लिए विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय, सतर्कता तथा प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यों को अधिक प्रभावी बनाते हैं, बल्कि मानव तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराई के उन्मूलन में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
पटना से आए संसाधन व्यक्तियों अधिवक्ता संजू सिंह एवं अधिवक्ता संभव गुप्ता तथा अधिवक्ता ताराकांत ऋषि ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए। उन्होंने मानव तस्करी से प्रभावित व्यक्तियों की पहचान, पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार, आघात-संवेदनशील दृष्टिकोण, पीड़ित-केंद्रित सहायता, विधिक संरक्षण तथा संबंधित नियमों एवं विनियमों के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स, पॉक्सो विशेष लोक अभियोजकों तथा एएचटीयू से जुड़े पुलिस पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डंकन अस्पताल एवं न्याय नेटवर्क परियोजना का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

