“जीवन को समझना: आणविक जीव विज्ञान में व्यावहारिक प्रशिक्षण” का समापन 

“जीवन को समझना: आणविक जीव विज्ञान में व्यावहारिक प्रशिक्षण” का समापन 
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-प्रतिभागियों को वितरित किए गए प्रमाण-पत्र

मोतिहारी। मुंशी सिंह महाविद्यालय, के वनस्पति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला  “जीवन को समझना: आणविक जीव विज्ञान में व्यावहारिक प्रशिक्षण” का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ।

समापन समारोह के अवसर पर कार्यशाला में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के बीच प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आणविक जीवविज्ञान की आधुनिक तकनीकों, प्रयोगशाला उपकरणों तथा वैज्ञानिक प्रयोगों की व्यावहारिक प्रक्रियाओं से परिचित कराना था।

तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न आणविक जीवविज्ञान तकनीकों का  प्रशिक्षण प्राप्त किया। इससे उन्हें प्रयोगशाला में वैज्ञानिक कार्यों को समझने और आधुनिक अनुसंधान  पद्धतियों के व्यावहारिक पक्ष से जुड़ने का अवसर मिला।

कार्यशाला में विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक के रूप में डॉ. विपुल वैभव, यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ जूलॉजी, बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर; डॉ. मो. कौसर नियाज़, अबीर बायो -सर्विसेज फाउंडेशन,  अफजल,  पी. डी. एम. टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली  ने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया।

पी. डी. एम. टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली की ओर से तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया। इस अवसर पर अबीर बायो -सर्विसेज फाउंडेशन पटना के साथ एक समझौता ज्ञापन  भी हस्ताक्षरित किया गया, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों के कौशल विकास, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भविष्य में सहयोग को और मजबूत किए जाने की दिशा में पहल की गई है।

समापन एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में प्रो. इकबाल हुसैन एवं डॉ. नरेंद्र सिंह ने उपस्थिति निभाई। कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एम. एन. हक के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया। उनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से महाविद्यालय में अकादमिक, कौशल-आधारित एवं अनुसंधानपरक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है।

कार्यशाला के संयोजक एवं वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सफीकुर रहमान ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों में प्रयोगशाला संबंधी दक्षता विकसित करने के साथ-साथ उनमें अनुसंधान के प्रति रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यावहारिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कार्यशाला को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विशेषज्ञों, तकनीकी सहयोगियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

डॉ. सफीकुर रहमान ने बताया कि मुंशी सिंह महाविद्यालय में विद्यार्थियों को आधुनिक जीवन विज्ञान एवं अनुसंधान की तकनीकों से जोड़ने तथा कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।

anand prakash

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