धान के पौधों में पीलापन दिखने पर करें आयरन सल्फेट का पर्णीय छिड़काव: डाॅ आशीष राय
मोतिहारी/परसौनी। धान की फसल में फूल खिलने से पहले यानि गाभा आने के समय और फूल खिलने के बाद या दाना भरते समय की अवस्थाओं में आयरन सल्फेट का स्प्रे करना बेहद फायदेमंद है। किसानो को उक्त सलाह परसौनी कृषि विज्ञान केंद्र पूर्वी चंपारण के सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी सह मृदा विशेषज्ञ डा.आशीष राय ने दी है।
डा. राय ने कहा कि गाभा यानी बालियां निकलने की अवस्था वह समय होता है जब बाली तने के अंदर बन रही होती है या बाहर आ रही होती है उस समय छिड़काव करने का उद्देश्य पौधे की सेहत सुधारना और प्रकाश संश्लेषण को अधिकतम करना होता है।
इस समय आयरन का स्प्रे करने से पत्तियों में क्लोरोफिल बढ़ता है इससे धान की डंठल और पत्ती लंबी, चौड़ी और गहरे हरे रंग की बनती है। यही पत्ती बाद में दानों को अधिक भोजन सप्लाई करती है, दानों की गुणवत्ता और बालियों की लंबाई बढ़ाने में मदद करता है।फूल खिलने के बाद यानी दूध भरने की अवस्था परागण पूरा होने के बाद, दाना भरने का समय होता है। इस समय पत्तियों पर छिड़का गया आयरन सल्फेट सीधे विकसित हो रहे चावल के दानों में स्थानांतरित हो जाता है यानी चावल के दानों में पोषण बढ़ाता है।
उन्होने कहा कि जब धान के खेत में फूल खिल रहे हों उस दौरान स्प्रे करने से बचना चाहिए। स्प्रे या तो फूल खिलने की शुरुआत से ठीक पहले करें या फूल झड़ने के बाद दाना बनते समय करें फूल खिलने के समय स्प्रे करने से परागण प्रभावित हो सकता है।
डा.राय ने किसानो को कहा कि धान में लोहे की कमी से होने वाले पीलेपन/सफेदपन और विकास में रुकावट को दूर करने के लिए आयरन सल्फेट का पर्णीय छिड़काव अत्यंत लाभकारी माना गया है। क्योकी जिन मिट्टियों का pH मान 8 या उससे अधिक (क्षारीय) होता है, उनमें धान की फसल में लोहे की कमी एक आम समस्या है।
लोहे की कमी के मुख्य लक्षण:
नई पत्तियों का पीलापन/सफेदपन: फसल की सबसे ऊपरी और नई पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं, जबकि पत्तियों की नसें हरी दिखाई देती हैं और समस्या बढ़ने पर पूरी पत्ती सफेद हो जाती है और पौधे का विकास रुक जाता है।
रोकथाम एवं उपचार:
फेरस सल्फेट का छिड़काव: 0.5% फेरस सल्फेट (लगभग 5 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करें।

